राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में आजीवन कारावास के दोषी लक्ष्मणदास को 20 दिन की पहली पैरोल की अनुमति दी है। कोर्ट ने पैरोल अस्वीकार करने वाले जिला पैरोल सलाहकार समिति के 14 जुलाई के आदेश को रद्द कर दिया। जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने यह रिपोर्टेबल जजमेंट 6 दिसंबर को सुनाया। जोधपुर की प्रताप नगर संजय-ए कॉलोनी निवासी लक्ष्मणदास पुत्र खेमचंद को ट्रायल कोर्ट ने अपने ही बेटे की हत्या का दोषी करार दिया था। वह वर्तमान में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है और फिलहाल ओपन एयर कैंप बाड़मेर में है। उसने अपनी पहली 20 दिन की पैरोल के लिए यह याचिका दायर की थी। पैरोल प्रणाली पर टिप्पणी: राजस्थान हाईकोर्ट ने पैरोल प्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि “वर्तमान पैरोल व्यवस्था में ऐसे कैदियों के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है जो बेघर हैं, जिनका कोई अभिभावक नहीं है या परिवार का समर्थन नहीं है। कोर्ट ने कनाडा जैसे विकसित देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कम्युनिटी करेक्शन सेंटर और रेजिडेंशियल फैसिलिटीज हैं, जो बिना घर और परिवार वाले पैरोलियों को आवास और भोजन उपलब्ध कराती हैं। कोर्ट ने कहा कि “यह समय है कि सरकार अपनी पैरोल नीति पर पुनर्विचार करे, ताकि ऐसे कैदियों की स्थितियों का ध्यान रखा जा सके जिनके पास रहने के लिए जगह या देखभाल करने वाला कोई नहीं है।” पैरोल अस्वीकृति का आधार और कोर्ट की टिप्पणी जिला पैरोल सलाहकार समिति, जोधपुर ने 14 जुलाई को याचिकाकर्ता की पैरोल याचिका को अस्वीकार कर दिया था। यह अस्वीकृति मुख्य रूप से पुलिस उपायुक्त, जोधपुर (पश्चिम) और परिवीक्षा एवं कारागार कल्याण अधिकारी की रिपोर्ट पर आधारित थी, जिन्होंने परिवार और पड़ोसियों की आपत्तियों के आधार पर पैरोल की सिफारिश नहीं की थी। वकील के तर्क: याचिकाकर्ता के लिए उपस्थित एमीकस क्यूरी अंजलि कौशिक ने तर्क दिया कि पैरोल का उद्देश्य अपराधी का पुनर्वास और समाज में पुनर्समावेश है। चूंकि याचिकाकर्ता ने ओपन एयर कैंप में रहते हुए जेल में अच्छा आचरण प्रदर्शित किया है, इसलिए पैरोल से इनकार करना गलत है। कोर्ट ने कहा: कोर्ट ने कहा कि पैरोल का उद्देश्य कैदी के अच्छे आचरण को प्रोत्साहित करना है, और यह पुनर्वास और समाज में पुनर्समावेश का एक अवसर है। कोर्ट ने माना कि समिति याचिकाकर्ता के अनुमोदित आचरण की सराहना करने में विफल रही। आपत्ति पर कोर्ट का रुख: याचिकाकर्ता को अपने ही बेटे की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे में याचिकाकर्ता की पत्नी, रिश्तेदारों और पड़ोसियों का पैरोल का विरोध करना स्वाभाविक है, लेकिन उनकी सहमति अप्रासंगिक है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून प्रवर्तन एजेंसी को पैरोल पर रिहाई से वास्तविक खतरे का स्वतंत्र रूप से निष्कर्ष निकालना होगा। बिना निवास या संरक्षक वाले कैदियों पर कोर्ट की टिप्पणी चूंकि याचिकाकर्ता के परिवार/रिश्तेदारों ने उसके साथ रहने से इनकार कर दिया, कोर्ट ने उसे “बिना निवास और देखभाल करने वाले” व्यक्ति के रूप में माना। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पैरोल को केवल इसलिए अस्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि पैरोली के पास स्थायी निवास, देखभाल करने वाला या अभिभावक नहीं है। ऐसा करना उन कैदियों के बीच भेदभाव होगा जिनके पास निवास या देखभाल करने वाला है और जिनके पास नहीं है, जो समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है। पैरोल के लिए शर्तें और निर्देश कोर्ट ने आपराधिक रिट याचिका को स्वीकार करते हुए पैरोल के लिए निम्नलिखित शर्तें और निर्देश दिए हैं: पैरोल अवधि और बॉन्ड: याचिकाकर्ता 20 दिन की पहली पैरोल के लिए पात्र है, जिसके लिए उसे संबंधित जेल अधीक्षक की संतुष्टि पर 50,000/- रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड प्रस्तुत करना होगा। अभिभावक की नियुक्ति: उसकी रिहाई जिला स्तरीय समिति द्वारा एक अभिभावक की नियुक्ति पर निर्भर है। यह अभिभावक पैरोल अवधि के दौरान याचिकाकर्ता के आचरण की निगरानी करेगा और संबंधित जिला मजिस्ट्रेट को इसकी रिपोर्ट करेगा। नियुक्ति प्रक्रिया: जिला स्तरीय समिति इस आदेश की प्राप्ति की तारीख से एक सप्ताह के भीतर संबंधित जेल अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक/आयुक्त और जिला मजिस्ट्रेट के परामर्श से अभिभावक के नामांकन पर निर्णय लेगी। रिहाई का समय: याचिकाकर्ता को समिति द्वारा अभिभावक की नियुक्ति की तारीख से दो दिनों के भीतर पैरोल पर रिहा किया जा सकता है। निवास प्रतिबंध: याचिकाकर्ता अपने मूल निवास या अपनी पत्नी और पड़ोसियों के पुलिस स्टेशन की सीमा में प्रवेश नहीं करेगा। आवास और सहायता: राजस्थान राज्य, जिसका प्रतिनिधित्व प्रमुख सचिव (गृह) और अन्य कर रहे हैं , उसे 20 दिन की पैरोल अवधि के लिए आवासीय आवास, भोजन और निर्वाह भत्ता प्रदान करेगा। उन्हें याचिकाकर्ता को अपने खर्चों को पूरा करने के लिए उस अवधि के दौरान कमाई के लिए आवश्यक सहायता भी प्रदान करनी होगी।


