बठिंडा डीसी दफ्तर के बाहर किसानों का धरना:मृत महिलाओं के परिजनों के लिए मांगा मुआवजा, बोले- घायलों को दी जा रही जबरन छुट्‌टी

संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर टोहाना महापंचायत में जा रही तीन महिलाओं की सड़क हादसे में हुई मौत के बाद मृतकों के परिजनों की सार ना लिए जाने से नाराज किसानों ने आज बीकेयू एकता उग्राहा के बैनर तले बठिंडा के डिप्टी कमिश्नर दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर धरना दिया। भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां के जिला अध्यक्ष शिंगारा सिंह मान ने कहा कि घायलों और मृतकों को मुआवजा मिलने तक धरना जारी रहेगा और मृतकों का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मामूली चोटों के साथ एम्स बठिंडा में भर्ती कई गंभीर घायलों को जबरन छुट्टी दिए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। किसान नेताओं ने सरकार की चुप्पी की कड़ी निंदा की और कहा कि एक तरफ भगवंत मान की सरकार किसानों की हितैषी होने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हादसे के डेढ़ दिन बीत जाने के बाद भी पंजाब सरकार मांगों को नजरअंदाज कर रही है इसके कारण पीड़ित परिवार और अन्य किसान कड़ाके की ठंड में अस्पतालों और सड़कों पर घूम रहे हैं। मांग पूरी ना होने तक जारी रहेगा धरना प्रदर्शन उन्होंने कहा कि सरकार के इस अड़ियल रवैये के खिलाफ बठिंडा और बरनाला के डिप्टी कमिश्नर दफ्तरों के सामने लगातार दिन-रात धरने शुरू कर दिए गए हैं, जो मांगें पूरी होने तक जारी रहेंगे। उन मांगों को लेकर उन्होंने कहा कि जिन तीन महिलाओं की मौत हुई उनके परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा, एक महिला को सरकारी नौकरी और परिवार पर लगे सभी कर्ज को खत्म किया जाए। इसके अलावा गंभीर रूप से घायलों को पांच लाख और अन्य घायलों को दो लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए और घायलों का इलाज सरकारी खर्च पर विशेषज्ञ डॉक्टरों से कराया जाए। किसान नेताओं ने दोनों जिलों के किसान कार्यकर्ताओं और सभी लोगों से धरना-प्रदर्शन में अधिक से अधिक भाग लेने की अपील की।

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