आदिवासी बोले- पुश्तैनी जमीन बिना सहमति के छीनी:शिवपुरी कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठे, कहा- न मुआवजा तय किया और न वैकल्पिक व्यवस्था

शिवपुरी में ट्रांसपोर्ट नगर के निर्माण को लेकर प्रशासन और आदिवासी पट्टाधारकों के बीच विवाद चल रहा है। शीर बांसखेड़ी गांव के आदिवासी परिवारों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन उनकी पुश्तैनी जमीन पर बिना सहमति और उचित प्रक्रिया के जबरन कब्जा कर निर्माण कार्य करा रहा है। सोमवार को इसी विरोध में प्रभावित परिवार बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचकर धरने पर बैठ गए। आदिवासी परिवारों का कहना है कि वे इस जमीन पर सौ साल से अधिक समय से खेती कर रहे हैं और उनके पास वैध पट्टे भी मौजूद हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन ने न तो कोई नोटिस दिया, न मुआवजा तय किया और न ही विस्थापन की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की। अचानक खेतों में मशीनें उतारकर उनकी फसलें नष्ट कर दी गईं और पक्के निर्माण की शुरुआत कर दी गई, जिससे उनकी आजीविका पर संकट आ गया है। प्रशासन ने आवास योजना की किस्त रोकी पीड़ित गोपाल आदिवासी ने बताया कि जिस आवास योजना के तहत उन्हें कुटीर निर्माण की किस्त मिलनी थी, वह भी प्रशासन ने रोक दी है। इससे उनकी अधूरी झोपड़ियां भी तैयार नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने कहा, “एक ओर हमारी जमीन छीनी जा रही है, दूसरी ओर सरकारी योजनाओं का लाभ भी हमसे छीन लिया गया है।” आदिवासी परिवारों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी जमीन पर निर्माण कार्य नहीं रोका जाता और उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा।

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