भास्कर खास मुरलीपुरा के 76 वर्षीय नाथूलाल खण्डेलवाल ने 10 साल में 1.91 करोड़ राम नाम लिखे हैं। इनमें से 1 करोड़ 80 लाख 75 हजार राम नाम राम नाम धन संग्रह बैंक में जमा कराए हैं। शेष 11 लाख राम नाम उन्होंने बैंक को मेहनत के रूप में दे दिए। नाथूलाल सोमवार को गोविंददेवजी मंदिर के सत्संग भवन में चल रही 17.5 अरब राम नाम की परिक्रमा करने आए। उन्होंने सत्संग में बैठकर राम नाम लिखे और पुस्तक जमा कराकर पासबुक में एंट्री कराई। गोविंददेवजी मंदिर में 13 दिसंबर तक यह परिक्रमा चलेगी। भक्त सुबह 5 से शाम 7 बजे तक परिक्रमा कर सकेंगे। बैंक में 38 साल में जमा हुए 135 अरब राम नाम {बैंक की शुरुआत रामनवमी के दिन 7 अप्रैल 1987 को हुई थी। 62000 खाताधारक, 135 अरब राम नाम का संग्रह इस बैंक में हो चुका है। 735 खाताधारक 6 से 12 वर्ष की उम्र के हैं। {बैंक का मुख्य कार्यालय पुष्कर में बनकर तैयार हो चुका है। 6 दिन में 90 हजार लोगों ने परिक्रमा की, इनमें युवाओं की संख्या अधिक यहां गोविंद के दरबार में लाए गए 17.5 अरब राम नाम की 2 दिसंबर से अब तक 6 दिन में लगभग 90 हजार लोग परिक्रमा कर चुके हैं। बैंक फाउंडर बालकृष्ण पुरोहित बताते हैं कि परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं में युवाओं की संख्या अधिक है। 84 लाख रामनाम पिछले एक साल में लिखने वाले जयपुर संभाग के 250 खाताधारकों का यहां सम्मान किया गया। 10 मिनट से लेकर एक सप्ताह में पूरी होती है एक पुस्तक नाथूलाल खण्डेलवाल राम नाम धन संग्रह बैंक की जयपुर शाखा के प्रबंधक भी हैं। वे बताते हैं कि उन्हें एक पुस्तक पूरी करने में 10 मिनट से लेकर एक सप्ताह का समय लगता है। कहते हैं कि लगातार एकसाथ लिखता हूं तो 10 मिनट में पूरे 26555 राम नाम लिख लेता हूं। कभी-कभी पूरा सप्ताह भी लग जाता है। मैं 15 जून 2015 से इस बैंक का खाताधारक हूं। अब तक 723 पुस्तक जमा करा चुका हूं। इसी तरह जयपुर के ही रामेश्वरलाल भाला रामनाम की रोज एक पुस्तक लिखते हैं। नाथूलाल


