जिले में चुनाव तैयारियों के बीच गंभीर मामला सामने आया है, जहां चुनाव आयोग के निर्देशों को अनदेखा करते प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग के मेडिकल स्टाफ को चुनावी डयूटी में तैनात कर दिया है। हैरानीजनक बात यह है कि ड्यूटी सूची में ओपीडी संचालित करने वाले स्पेशलिस्ट डॉक्टर भी शामिल हैं। चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सक, इमरजेंसी/क्रिटिकल केयर स्टाफ, नर्सिंग स्टाफ, ऑपरेशन थिएटर टीम को चुनावी ड्यूटी से मुक्त रखा जाना चाहिए ताकि स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हों। इसके बावजूद कई महत्वपूर्ण विशेषज्ञों को चुनाव ड्यूटी के आदेश जारी किए गए हैं। कुछ डॉक्टरों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह न केवल मरीजों की सुरक्षा के लिए हानिकारक है बल्कि चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का भी उल्लंघन है। इस मुद्दे के प्रकाश में आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि मेडिकल स्टाफ को ड्यूटी से मुक्त करने पर विचार किया जा रहा है। सिविल सर्जन डॉ. गुरप्रीत सिंह राय इस स्थिति के हल के लिए डीसी ऑफिस जाकर मुख्यमंत्री के रीजनल सलाहकार से बातचीत की। उधर, मरीजों और नागरिकों ने भी मांग की है कि चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी जाए और डॉक्टरों को चुनावी कार्यों से मुक्त रखा जाए। इस बारे में डीसी कम जिला चुनाव अधिकारी राहुल का कहना है कि चुनाव के लिए करीब 5500 स्टाफ की जरूरत है तो इसमें कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को शामिल करके ही पूरा किया जा सकता है।


