भास्कर संवाददाता | रायसेन जनसुनवाई में उदयपुरा क्षेत्र के ग्राम पिपरिया पुआरिया में सामाजिक अस्पृश्यता का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। भरतसिंह धाकड़ और उसके परिवार का गांव में सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है। किसी भी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाता और अछूत जैसा व्यवहार किया जा रहा है। वजह भरतसिंह और उसके दो साथी, मनोज पटेल और सत्येंद्र रघुवंशी ने दलित परिवार के यहां श्राद्ध में भोजन किया था। चौंकाने वाली बात यह है कि पंचायत में बैठक कर सरपंच भगवान सिंह पटेल सहित बालाराम पटेल, नागेन्द्र पटेल, निरंजन पटेल, जवाहर पटेल, लखन धाकड़, लक्ष्मण दास, रामसेवक शर्मा, जसमन सिंह, चन्द्र प्रकाश (उपसरपंच) आदि ने फरमान जारी किया कि दलित के यहां भोजन करना “गोहत्या से बड़ा पाप” है। इसके लिए गंगा स्नान कर “शुद्धिकरण” करना होगा और गांव में भंडारा कराना होगा। दबाव में सहायक सचिव मनोज पटेल और शिक्षक सत्येंद्र रघुवंशी ने गंगा स्नान किया, लेकिन भरतसिंह ने अपराध मानने से इनकार कर दिया। भरत का कहना है िक वह उदयपुरा में रहता है, लेकिन गांव में उसके पिता निरंजन सिंह और परिवार के साथ सामाजिक अपमान हो रहा है। न किसी कार्यक्रम में बुलाया जाता है, न सामान्य व्यवहार किया जाता है। भरत ने एसडीएम और पुलिस को आवेदन दिए, लेकिन समाधान नहीं मिला। मंगलवार को जन सुनवाई में भी आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। मंत्री का हस्तक्षेप भी नाकाम विवाद बढ़ने पर सितंबर में राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल गांव पहुंचे। दलित सफाई कर्मचारी संतोष परोच के घर भोजन कर सामाजिक समरसता का संदेश दिया। लेकिन परिणाम शून्य रहा। गांव के एक वर्ग का कहना है िक “मंत्री के भोजन करने से क्या होता है? कोई कार्यक्रम में नहीं बुला रहा तो यह आपसी मामला ^ऐसा कुछ नहीं है, आरोप सरासर निराधार है। राज्य मंत्री ने आकर भी लोगों की समझाइश दी थी। अब कोई व्यक्तिगत विवाद के चलते भरत और उसके पिता को किसी कार्यक्रम में नहीं बुला रहा तो ये उनका आपसी मामला है। – भगवान सिंह पटेल, सरपंच पिपरिया पुआरिया पिता को दोष से बचाना है तो जीते-जी पिंडदान करो पंचायत में भरतसिंह ने सवाल उठाया कि भोजन उसने किया है तो उसके पिता को क्यों बहिष्कृत किया जा रहा है। इस पर गांव के लोगों ने चौंकाने वाला जवाब दिया िक “अगर पिता को दोष से मुक्त रखना है तो मुंडन कराकर जीते-जी उनका पिंडदान कर दो और संबंध तोड़ने की घोषणा कर दो, तभी वे तुम्हारे पाप से मुक्त माने जाएंगे।


