भास्कर संवाददाता | भैरूंदा भैरूंदा और आसपास के क्षेत्रों में यूरिया खाद की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रबी सीजन में खाद की बढ़ती मांग और सीमित स्टॉक के कारण किसानों को सुबह तड़के से ही मार्केटिंग सोसायटी के बाहर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। कड़ाके की ठंड के बावजूद किसान सुबह 5 बजे से लाइन में लग जाते हैं। टोकन वितरण सुबह 7 बजे के बाद शुरू होता है। सीमित उपलब्धता के चलते सोसायटी द्वारा हर किसान को सिर्फ तीन बोरी यूरिया ही दिया जा रहा है। इस व्यवस्था को लेकर कई किसानों ने नाराज़गी जताई। सोसायटी का कहना है कि कम स्टॉक में अधिक से अधिक किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए यह कदम उठाना पड़ रहा है। सोसायटी के गेट के बाहर कीचड़ और पानी जमा होने के बावजूद किसानों को घंटों खड़े रहना पड़ता है। यूरिया की कमी से फसल पर बुरा असर पड़ेगा: किसानों ने बताया कि यूरिया की कमी से फसल पर बुरा असर पड़ सकता है। समय पर खाद न मिलने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। किसानों ने आरोप लगाया कि खुले बाजार में व्यापारी 380 से 450 प्रति बोरी तक यूरिया बेच रहे हैं। प्रशासन ऐसे व्यापारियों पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं कर रहा है। इस कारण कालाबाजारी तेज़ हो गई है। हालांकि, मार्केटिंग सोसायटी अधिकारियों का कहना है कि कुछ किसानों के खाते बंद हैं। कुछ डिफाल्टर हैं और कई बटाईदार किसानों के पास दस्तावेज अधूरे हैं। फिर भी सोसायटी इन किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था कर रही है। यूरिया की उपलब्धता बढ़ाने की मांग मंगलवार को भी किसान भगवान सिंह, गंभीर सिंह जाट, हरिओम पटेल, नारायण शर्मा, अनिल मुकाती सहित सैकड़ों किसान खाद वितरण स्थल पर घंटों लाइन में खड़े नजर आए। उनकी मांग है कि यूरिया की उपलब्धता बढ़ाएं, ताकि कृषि कार्य प्रभावित न हो और फसलें समय पर पोषण प्राप्त कर सकें। इस मामले पर किसान नेता गजेंद्र सिंह जाट ने कहा कि कई किसान बटाई पर खेती कर रहे हैं। कुछ शासकीय भूमि जोतते हैं, तो कुछ किसान अपनी फसल बेचकर यूरिया खरीदने की तैयारी में थे, लेकिन अब तक उन्हें खाद नहीं मिल पाया है।


