इंदौर में पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह को कार्यभार संभाले लगभग एक साल पूरा होने को है। इस दौरान उन्होंने ‘ऑपरेशन क्लीन’ चलाकर विभाग की छवि सुधारने का अभियान तेज किया। अभियान के तहत दो टीआई का डिमोशन किया गया, जबकि पांच पुलिसकर्मियों को सेवा से हटाकर सख्त संदेश दिया गया। मंगलवार को भी एक कार्यवाहक एएसआई सुभाषचंद्र वर्मा पर कार्रवाई करते हुए पांच वर्ष के लिए डिमोशन करते हुए उसे आरक्षक बनाया गया। इसके विपरीत, विभाग के भीतर यह नाराजगी भी उभर रही है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट तक में विभाग की छवि धूमिल करने वाले विवादित टीआई इंद्रमणि पटेल पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कई कर्मचारी इसे लेकर बंद जुबान में असंतोष जाहिर कर रहे हैं। उनका कहना है कि इंदौर पुलिस की छवि प्रदेश ही नहीं, बाहर तक प्रभावित हुई है, लेकिन संबंधित अधिकारी पर कदम न उठाना कई सवाल खड़े करता है। खासकर तब, जब थाने में कई मामलों में एक जैसे ‘पॉकेट गवाह’ मिलने की बातें भी सामने आईं। पुलिस अफसर और कर्मचारियों को दिया मैसेज कमिश्नर संतोष सिंह ने विभाग में अनुशासन और पारदर्शिता लाने के लिए ‘ऑपरेशन क्लीन’ चलाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अच्छा काम करने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया जाएगा, जबकि विभाग की छवि खराब करने वालों पर कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। ऑपरेशन के चलते कई पुलिसकर्मियों को अनुशासनहीनता, लापरवाही और गैर–हाजिरी के मामलों में दंडित किया गया है।इसी क्रम में विभाग में अब चंदन नगर टीआई को लेकर भी हलचल बढ़ गई है। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि उनके कामकाज से भी पुलिस विभाग की छवि प्रभावित हुई है। ये खबर भी पढ़ें… इंजीनियर को 30 घंटे थाने में बैठाने का मामला:याचिकाकर्ता बैकफुट पर पिता के स्थान पर इंजीनियर बेटे राजेंद्र दुबे (राजा) को 30 घंटे हिरासत में रखने के मामले में याचिकाकर्ता आकाश तिवारी बैकफुट पर आ गए हैं। वह पहले ही याचिका वापस लेने और वकील बदलने की अर्जी दे चुके हैं। हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई शुरू होते ही कोर्ट ने पूछा कि क्या आप याचिका वापस लेना चाहते हैं, वकील भी बदलना चाहता हैं। तिवारी ने हां कहा। कोर्ट ने फिर पूछा कि क्या आप पर कोई दबाव है? तो बोले-नहीं। पूरी खबर पढ़ें


