कोटा में दैनिक भास्कर कार्यालय में आयोजित भास्कर टॉक शो में शहर के वरिष्ठ डॉक्टरों ने स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी बीमा योजनाओं को लेकर बेबाकी से अपने विचार रखे। टॉक शो का मुख्य सुझाव रहा कोटा को मेडिकल सिटी बनाया जाए। डॉक्टरों ने कहा कि जब देश के 64 प्रतिशत मरीजों का इलाज निजी अस्पतालों में होता है, तब भी सरकार नीतियां बनाते समय प्राइवेट सेक्टर से संवाद नहीं करती, जो बेहद निराशाजनक है। प्राइवेट डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना की खामियां गिनाते हुए कहा कि कई सर्जरी के कोड सिर्फ सरकारी अस्पतालों को दिए गए हैं, जिससे निजी अस्पताल मरीजों का इलाज नहीं कर पा रहे। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार यह मानती है कि प्राइवेट डॉक्टर कम प्रशिक्षित हैं? सुवि नेत्र चिकित्सालय के निदेशक डॉ. सुरेश पांडेय ने कहा कि शिक्षा नगरी कोटा अब मेडिकल सिटी के रूप में विकसित किया जा सकता है। सामूहिक प्रयास से कोटा में मेडिकल टूरिज्म की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। वरिष्ठ न्यूरो फिजिशियन डॉ. विजय सरदाना ने बढ़ते ट्रोमा केसों को देखते हुए इमरजेंसी मेडिकल सर्विसेज को मज़बूत करने और मेडिकल एजुकेशन में एआई को जोड़ने की जरूरत बताई। डॉ. कपिल जैन ने कहा कि आयुष्मान योजना में पैकेज दरें बेहद कम हैं, जबकि इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा है। डॉ. अमित व्यास ने कहा कि हेल्थकेयर केवल सरकार के बस की बात नहीं है, प्राइवेट और सरकारी सेक्टर को बराबर भागीदारी देनी चाहिए। डॉ. डीएस ढिल्लन ने इमरजेंसी के लिए अलग पैकेज बनाने की मांग की। डॉ. एमएल अग्रवाल ने कहा कि डॉक्टरों की नकारात्मक छवि बनाई जा रही है, जबकि वे बिना किसी सरकारी सहायता के काम कर रहे हैं। डॉ. केके डंग ने प्रदूषण और अस्थमा के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई। डॉ. हेमराज सोनी ने स्वच्छता और घुमंतू बच्चों के टीकाकरण पर जोर दिया। फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों ने सरकारी योजनाओं में फिजियोथेरेपी पैकेज शामिल करने की बात रखी। डॉ. अमित सक्सेना ने कहा प्राइवेट सेक्टर सरकार के साथ पूरी तरह सहयोग कर रहा है, अब सरकार को भी सहयोग का हाथ बढ़ाना चाहिए।


