इंदौर-भोपाल के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त:70 शहरों में लागू पुलिस कमिश्नरी को समान अधिकार देने की तैयारी

पुलिस कमिश्नरी सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक अनूठा प्रयास शुरू किया है। सरकार द्वारा देश के 70 शहरों में लागू पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली को समान अधिकार देने की पहल शुरू की गई है। इसका उद्देश्य है कि जहां-जहां पुलिस कमिश्नरी लागू है, वहां सभी के अधिकार समान हों। इसके लिए प्राथमिक तौर पर एक अध्ययन भी करवाया जा रहा है। इसके लिए नेशनल पुलिस एकेडमी (एनपीए) को नोडल एजेंसी बनाकर जिम्मेदारी सौंपी गई है। एनपीए ने इंदौर-भोपाल पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर अपने यहां एक नोडल अधिकारी नियुक्त कर जानकारी उपलब्ध करवाने को कहा है। एनपीए को कमिश्नरी सिस्टम की जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए राज्य में नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं। ये अधिकारी डीसीपी रैंक के हैं, जो मप्र में भोपाल और इंदौर के लिए कमिश्नरी सिस्टम को लेकर पुलिस को मिले पॉवर और कमजोरियों की जानकारी देकर एनपीए को अपडेट करेंगे। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो पुलिस कमिश्नरी मजबूत होगी। अभी 70 शहरों में कमिश्नरेट प्रणाली लागू एनपीए ने इंदौर-भोपाल की कमिश्नरी प्रणाली को लेकर एक टीम गठित करने के लिए पत्राचार किया है। इसके लिए हमने भोपाल में डीसीपी श्रृद्धा को नियुक्त किया है। जल्द ही हमारी एक टीम तुलनात्मक जानकारी एनपीए को देगी। – हरिनारायणाचारी मिश्र, पुलिस कमिश्नर भोपाल अब पुलिस के अधिकार और बढ़ेंगे
कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस कमिश्नरी सिस्टम मप्र के इंदौर व भोपाल में लागू किया गया था। लेकिन पुलिस को इस सिस्टम में शामिल मुख्य पॉवर (शक्तियां) नहीं मिली हैं। इसमें ये पॉवर अहम है जो पुलिस को मिलने चाहिए थे- आबकारी लाइसेंस व लीकर लाइसेंस देने व रद्द करने की अनुमति। {फायर आर्म्स जारी करने व रद्द करने की शक्ति।
अपराधी को रासुका में निरुद्ध करने की शक्ति। अभी पुलिस सिर्फ इन पॉवर के साथ काम कर रही है- मजिस्ट्रियल शक्तियां: सीआरपीसी की धारा 107-116 (शांति भंग रोकने), 144 (निषेधाज्ञा), और 145 (विवादित संपत्ति) के तहत अंतिम निर्णय लेने का अधिकार। सार्वजनिक आयोजनों पर नियंत्रण: किसी भी जुलूस, प्रदर्शन, या सांस्कृतिक कार्यक्रम की अनुमति देना या रोकना। चार साल पहले लागू हुई थी पुलिस कमिश्नरी
21 नवंबर, 2021 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा के बाद 9 दिसंबर 2021 को यह सिस्टम इंदौर और भोपाल में लागू किया गया। इसमें इंदौर के 36 व भोपाल के 38 थानों को सिस्टम में शामिल किया गया है।

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