‘सब कहते थे- अंधी क्रिकेट क्या खेलेगी…अब वर्ल्ड कप जीती’:बोली– गुल्लक फोड़कर बैट–बॉल खरीदे, प्राइज मनी महज 53 हजार; एमपी की ऐसी तीन लड़कियां

दृष्टिबाधित को समाज में सब ताना मारते हैं। जब मैं गांव में क्रिकेट खेलती थी तो लोग कहते- अंधी कैसे खेलेगी? यह कैसा क्रिकेट है?… और आज जब हम जीतकर आए हैं तो वही लोग मिठाई बांटकर कह रहे हैं कि लड़की ने कुछ कर दिखाया है। यह कहना है भारतीय ब्लाइंड महिला क्रिकेट टीम की विश्वकप विजेता खिलाड़ी सुनीता सराठे का, जिन्हें इतनी बड़ी उपलब्धि के बाद भी सिर्फ 53 हजार रुपए की इनाम राशि मिली है। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के नयागांव की रहने वाली सुनीता जन्म से दृष्टिबाधित हैं। कभी गांव में ताने सुनने वाली यह खिलाड़ी आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहरा चुकी है। नेपाल को हराकर पहली बार आयोजित ब्लाइंड महिला टी-20 विश्वकप जीतने वाली भारतीय टीम में सुनीता के साथ दमोह की सुषमा पटेल और बैतूल की दुर्गा येवले भी शामिल रहीं। जीत के बाद गांव में बधाइयों की भीड़ जरूर उमड़ी, लेकिन सरकारी स्तर पर सम्मान और सहायता की कमी सुनीता को निराश भी करती है। दैनिक भास्कर टीम पिपरिया से जब 10 किलोमीटर दूर नयागांव पहुंची तो कच्चे घर, मिट्टी के मैदान और सीमित साधनों के बीच सुनीता के संघर्ष की पूरी कहानी दिखाई दी। गुल्लक के पैसों से बैट-बॉल खरीदकर शुरू हुआ यह सफर आज विश्वकप जीत तक पहुंचा है, लेकिन सुनीता की आवाज अब भी वही है। “हमने कर दिखाया, पर उम्मीद है हमारा सम्मान भी उतना ही हो।” पढ़िए…ग्राउंड रिपोर्ट। MP की तीन बेटियां, भारतीय ब्लाइंड महिला क्रिकेट टीम की ताकत टीम में मध्य प्रदेश की तीन खिलाड़ी शामिल
भारतीय ब्लाइंड महिला क्रिकेट टीम में मध्य प्रदेश से तीन खिलाड़ियों का चयन हुआ। इसमें नर्मदापुरम की सुनीता सराठे, दमोह की सुषमा पटेल, बैतूल की दुर्गा येवले शामिल हैं। मध्य प्रदेश ब्लाइंड क्रिकेट एसोसिएशन (CABMP) के महासचिव सोनू गोलकर ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा- हमारे लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है कि भारतीय महिला ब्लाइंड क्रिकेट टीम ने पहला टी-20 विश्व कप जीतकर इतिहास रचा है। सभी मैच भारत ने जीते और मध्य प्रदेश की तीनों खिलाड़ियों का प्रदर्शन शानदार रहा। सुनीता ने बताया कि विश्वकप जीतकर लौटने के बाद टीम को दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का अवसर मिला। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने हाथों से खिलाड़ियों को लड्डू खिलाकर जीत की बधाई दी। सुनीता के अनुसार, यह मेरे जीवन का अविस्मरणीय क्षण था। प्रधानमंत्री ने बिल्कुल घर के अभिभावक की तरह स्नेह से बात की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी टीम को प्रोत्साहित करते हुए कहा था- मेहनत करते रहिए, देश आपके साथ है। उन्होंने खिलाड़ियों को राष्ट्रपति भवन की तस्वीर और प्रमाणपत्र स्मृति स्वरूप भेंट किया। क्रिकेट खेलता देख मजाक उड़ाते थे, अब वही बधाई दे रहे
28 वर्षीय खिलाड़ी सुनीता सराठे बताती हैं कि बचपन से ही दृष्टि कमजोर थी, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई पूरी की। क्रिकेट में रुचि तो थी, लेकिन साथ न मिलने से खेल को आगे नहीं बढ़ा पाईं। पढ़ाई पूरी करने के बाद जब वे चार साल पहले गांव लौटीं, तो मोहल्ले के 10-12 साल के बच्चे अरमान सहित अन्य से उनकी दोस्ती हो गई। सुनीता बताती हैं कि क्रिकेट खेलते देख गांव के कुछ लोग मजाक उड़ाते थे- दृष्टिबाधित है, कैसे खेलेगी? यह कोई क्रिकेट है क्या? लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। विश्वकप जीतकर लौटने के बाद वही लोग मिठाइयां बांट रहे हैं और कह रहे हैं- लड़की ने सच में कुछ कर दिखाया। सुनीता कहती हैं कि दृष्टिबाधित लोगों को समाज अक्सर कड़वी बातें सुनाता है, लेकिन जब वे सफल होते हैं तो सम्मान देने लगते हैं। सोहागपुर में आयोजित एक कैंप में संगठन के जनरल सेक्रेटरी सोनू गोलकर से उन्हें ब्लाइंड क्रिकेट की जानकारी मिली। उनकी मदद से सुनीता ने डिविजनल, स्टेट, नेशनल और फिर इंटरनेशनल मैच खेले। पहली बार खेले गए ब्लाइंड वर्ल्ड कप में भारतीय टीम विजेता बनी। बता दें कि सुनीता उस टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहीं। पिता सीमांत किसान, गरीबी में पला पूरा परिवार
सुनीता सराठे के पिता मनोहर सराठे सीमांत किसान हैं। उनके पास मात्र दो एकड़ जमीन है। खेती के साथ वे घर-घर जाकर दाढ़ी-कटिंग का काम भी करते हैं। परिवार बड़ा है- चार बेटियां और दो बेटे। दो बेटियां, देवकी और यशोदा, की शादी हो चुकी है। सुनीता तीसरे नंबर पर है, जबकि छोटे भाई-बहनों में नीतू, दीपक और हरिओम शामिल हैं। कठिन आर्थिक परिस्थितियों में पला-बढ़ा यह परिवार हमेशा संघर्षों से घिरा रहा, लेकिन बेटी सुनीता की रुचि और लगन को देखकर माता-पिता ने उसे कभी रोका टोकी नहीं की। मनोहर सराठे को न सिर्फ अपनी बेटी बल्कि पूरी टीम की उपलब्धि पर गर्व है। वे कहते हैं- पूरी टीम और मेरी बेटी सुनीता की कामयाबी पर बधाई। बेटियों ने देश, प्रदेश और गांव का नाम रोशन किया है। सरकार प्रदेश की तीनों बेटियों को नौकरी देकर प्रोत्साहन दे। मां अनीता सराठे कहती हैं- मुझे हमेशा भरोसा था कि बेटी एक दिन कामयाब जरूर होगी। कच्चे घर में रह रहा परिवार, मोबाइल पर देखा था पूरा मैच
सुनीता के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। मकान कच्चा, कबेलू का है। पीएम आवास से कुछ साल पहले ही दो कमरे बने। बाकी पूरा मकान कच्चा है। उसी में पूरा परिवार साथ में रहता है। घर में टीवी नहीं है तो छोटी बहन नीतू सराठे ने अपने मोबाइल पर विश्व कप क्रिकेट का लाइव फा
नल मैच दिखाया था। दूसरे राज्यों में इनाम, नौकरियां, हमें सम्मान तक नहीं दिया
सुनीता सराठे ने कहा मप्र सरकार से हमारी उम्मीद है कि दृष्टिबाधित खिलाड़ियों को मदद करें। आंधप्रदेश, उड़ीसा, कर्नाटक राज्य की हमारे साथ की खिलाड़ियों को वहां की सरकार ने इनाम में रुपए और सरकारी नौकरियां दीं। मंच पर बुलाकर सीएम ने सम्मान किया। पर हमारे यहां ऐसा नहीं हुआ। 10 दिन बाद भी न सम्मान के लिए बुलाया और न कोई इनाम दिया। हम चाहते है कि मप्र की तीनों बेटियों को नौकरी दी जाए। फिलहाल विश्वकप जीतने पर केवल 53 हजार रुपए की इनाम राशि टीम से हमें मिली है। श्रीलंका में हुआ फाइनल मैच, ऑल राउंडर की रही भूमिका
ब्लाइंड महिला क्रिकेट टी-20 विश्व कप का आयोजन पहली बार हुआ है। कुल 6 देश भारत, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका ने भाग लिया था। भारतीय टीम ने क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड इन इंडिया (सीएबीआई) डब्ल्यूबीसी के तहत हिस्सा लिया। 11 नवंबर को नई दिल्ली से शुरुआत हुई, फिर कुछ मैच बेंगलुरु में हुए। इसके बाद फाइनल मुकाबला श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में हुए। फाइनल में नेपाल द्वारा दिए गए 115 रनों के लक्ष्य को भारतीय टीम ने 12.1 ओवर में तीन विकेट खोकर हासिल कर शानदार जीत दर्ज की। नर्मदापुरम की सुनीता सराठे ने नेपाल का पहला विकेट थ्रो से गिराकर जीत दिलाई। सुनीता सराठे ने टीम में ऑल राउंडर की भूमिका निभाई थी। संबंधित खबर पढ़ें… बैतूल में दुर्गा के घर वालों को पता नहीं था मैं ब्लाइंड हूं, टीचर्स का सपोर्ट नहीं मिला… फिर भी हार नहीं मानी ‘अब तो मुझे लगता ही नहीं कि मुझ में कोई कमी है। मैं सब कुछ कर सकती हूं।’ यह कहना है मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के एक छोटे से गांव राक्सी की दुर्गा येवले (यादव) का, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और दृढ़ संकल्प से यह साबित कर दिया है कि कोई भी कमी इंसान को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। पूरी खबर पढ़ें दमोह की बेटी सुषमा ने कोलंबो में रचा इतिहास:दृष्टि बाधित टी20 विश्व कप में देश का प्रतिनिधित्व दमोह की जबेरा विधानसभा क्षेत्र के घाना मैली गांव की दृष्टि बाधित सुषमा पटेल ने कोलंबो में आयोजित टी20 विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए जीत हासिल कर इतिहास रच दिया है। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी का माहौल है। सुषमा के पिता बाबूलाल पटेल एक मजदूर हैं। पूरी खबर पढ़ें

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