अलवर जिला हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में 80 साल के कैलाश और 73 साल के मोहम्मद साबिर के शवों को लेकर मंगलवार शाम हंगामा हो गया था। कैलाश के परिवार को मोहम्मद साबिर का शव सौंप दिया गया था, जिसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया था। मामले का खुलासा होने पर परिवार को वापस बुजुर्ग कैलाश का अंतिम संस्कार करना पड़ा। वहीं मोहम्मद साबिर की अस्थियों को अलवर में ही दफनाना पड़ा। इतनी बड़ी चूक होने के बाद हॉस्पिटल प्रशासन ने जांच कमेटी गठित की है। पीएमओ डॉ. सुनील चौहान ने जांच कमेटी गठित की है। तीन दिन में जांच पूरी होगी। गलती का कारण समझकर व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी। इसके अलावा हॉस्पिटल में शव की फोटो-वीडियो बनाना अनिवार्य कर दिया है,ताकि भविष्य में गलती न हो। असल में 6 दिसंबर को पुलिस को तीन अज्ञात शव मिले थे। तीनों को अलवर जिला हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया था। 7 दिसंबर को राजगढ़ के थानाराजाजी के गांव के लोग 80 साल के बुजुर्ग कैलाश का शव उसके परिजन लेकर गए थे। उस दिन अंतिम संस्कार कर दिया। 9 दिसंबर को पता चला कि कैलाश की जगह पाली के मोहम्मद साबिर का अंतिम संस्कार कर दिया। कैलाश का शव तो मुर्दाघर में रखा है। यह जाने के बाद सब घबरा गए। तुरंत अस्पताल आए। यहां साफ हुआ कि सच में कैलाश की जगह साबिर का अंतिम संस्कार हो गया। लेकिन साबिर भी लावारिश था। उसके परिजन नहीं थे। वह मूल रूप से पाली की मजार पर रहता था। साबिर की अस्थियों को अलवर में दफनाया
पाली,अजमेर और अलवर में मुस्लिम समाज के लोगों को पता चला कि साबिर का इंतकाल हो गया है। शव अलवर हॉस्पिटल में हैं। उसका कोई वारिस नहीं है। ऐसे में अलवर जिला हॉस्पिटल आए। तब पता चला कि साबिर का शव गलती से थानाराजाजी भेज दिया और वहां अंतिम संस्कार हो गया। आखिर में उसकी अस्थियों को अलवर लाया गया और दफनाया गया। ये खबर भी पढ़िए- अंतिम संस्कार के बाद पता चला,शव किसी और का:अस्थि विसर्जन करने जाने लगा परिवार, तब पता लगा बुजुर्ग मुस्लिम था


