विदिशा जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र से लापता हुई तीन वर्षीय बच्ची को पुलिस ने 48 घंटे के भीतर सकुशल बरामद कर लिया है। इस कार्रवाई में मानव तस्करी के एक गिरोह का भी पर्दाफाश हुआ है, जिसमें चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। बच्ची को उसके दादा-दादी को सौंप दिया गया है। यह जानकारी मंगलवार को पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी ने एक प्रेस वार्ता में दी। पुलिस अधीक्षक काशवानी ने बताया कि बच्ची अपने माता-पिता के मजदूरी करने बाहर जाने के कारण दादा-दादी के साथ स्टेशन के पास रहती थी। वह दोपहर में खेलते समय अचानक लापता हो गई थी। काफी तलाश के बाद भी जब कोई सुराग नहीं मिला, तो एक यात्री ने परेशान दादा-दादी को देखकर कोतवाली पुलिस को सूचना दी। पुलिस के अनुसार, बच्ची की कोई तस्वीर उपलब्ध नहीं थी, जिससे उसकी पहचान एक बड़ी चुनौती बन गई थी। पुलिस टीमों ने बच्ची के कपड़ों और हुलिए के आधार पर तलाश शुरू की। जांच के दौरान शहर और आसपास के इलाकों में 235 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई और 135 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई। बच्ची की तलाश में ढोलखेड़ी, करारिया चौराहा, महानीम चौराहा, शमशाबाद और बैरसिया तक सघन अभियान चलाया गया। लगातार जांच और दबिश के बाद पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिसके परिणामस्वरूप बच्ची को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। पुलिस ने मानव तस्करी की धाराओं के तहत अर्जुन सिंह पाल, हरिबाई, जितेंद्र पाल और रवि पाल नामक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस गिरोह में बच्ची के अलावा अन्य बच्चे भी शामिल थे, जिन्हें सुरक्षित कर लिया गया है। पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी ने यह भी बताया कि ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत इस वर्ष अब तक 355 बालक-बालिकाओं को दस्तयाब किया जा चुका है। विदिशा पुलिस की यह कार्रवाई मानव तस्करी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है।


