लिव-इन संबंधों की कानूनी मान्यता समाप्त करने की मांग:आचार्य पाटोदिया ने कहा- आधुनिकता के नाम पर भारतीय वैवाहिक मूल्यों हो रहे कमजोर

पिंक सिटी प्रेस क्लब में बुधवार को मीरा चैरिटेबल ट्रस्ट, जयपुर द्वारा सेंटर फॉर पब्लिक अवेयरनेस एंड इन्फॉर्मेशन के डायरेक्टर आचार्य सत्यनारायण पाटोदिया की अगुआई में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। कार्यक्रम में लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता देने के गंभीर सामाजिक, सांस्कृतिक और वैवाहिक दुष्परिणामों पर चिंता जताई गई और इसकी कानूनी मान्यता समाप्त करने की मांग उठाई गई। आचार्य पाटोदिया ने कहा- आधुनिकता के नाम पर लिव-इन प्रथा भारतीय वैवाहिक और पारिवारिक मूल्यों को कमजोर कर रही है। उन्होंने विवाह व्यवस्था के महत्व, भारतीय संस्कृति में रिश्तों की भूमिका और लिव-इन संबंधों से समाज पर होने वाले प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने दावा किया कि लिव-इन रिश्तों में जन्म लेने वाले बच्चों का भविष्य भी अनिश्चितताओं से घिर जाता है। उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ते अनाचार और दुराचार को रोकने में सरकार कई बार विफल रहती है, जिसके बाद ऐसी व्यवस्थाओं को वैध करार देने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उज्जैन में वेश्यावृत्ति को रोक न पाने पर नगरपालिका ने इसे लाइसेंस जारी कर वैध कर दिया था। 79 वर्षीय आचार्य पाटोदिया, जो सनातन धर्म के चारों आश्रमों का पालन करने के साथ संगीत, कथक नृत्य और समाज सेवा से जुड़े हैं, वर्ष 2025 में राष्ट्रपति भवन में “गरिमापूर्ण वृद्धावस्था” कार्यक्रम में सम्मानित किए गए थे। उन्होंने बताया कि गहरी विपश्यना समाधि के दौरान उन्हें लिव-इन प्रथा को समाप्त करने और भारतीय सामाजिक व वैवाहिक संरचना की रक्षा करने का आदेश प्राप्त हुआ, जिसके बाद उन्होंने देशव्यापी जन आंदोलन शुरू किया है। आचार्य पाटोदिया ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर लिव-इन रिलेशनशिप की कानूनी मान्यता समाप्त करने के लिए कानून बनाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 53वें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत शर्मा से भी इस विषय में स्वप्रेरणा से संज्ञान लेने की अपील की है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रमोद जैन चौरड़िया, संस्थापक अध्यक्ष, मानव मिलन संस्थान, कमल बाबू जैन, पूर्व अध्यक्ष राजस्थान जैन सभा एवं अध्यक्ष राजस्थान महासभा, डॉ सुरेश चंद्र शर्मा, संस्थापक अध्यक्ष
सर्व समाज जागृति संघ, रुचि साधवानी ने भी अपने विचार व्यक्त किए और लिव-इन रिलेशनशिप को समाज के लिए घातक बताते हुए इसकी कानूनी मान्यता तुरंत समाप्त करने की मांग की।

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