खालिद अख्तर खान | कांकेर बहुप्रतीक्षित खेल प्रतियोगिता बस्तर ओलंपिक 11 दिसंबर से जगदलपुर में शुरू हो रही है। इसमें बस्तर डिविजन के सातों जिले कांकेर, बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर के खिलाड़ी हिस्सों लेंगे। इस बस्तर ओलंपिक की सबसे खास बात होगी कि इसमें पूरे बस्तर से आत्मसमर्पित नक्सलियों को अपनी खेल प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। जो नक्सली अब तक जंगल में पुलिस के साथ आमने-सामने की जंग लड़ते थे, अब अपनी टीम बना खेल मैदान में अपना दमखम दिखाएंगे। इस प्रतियोगिता में पुलिस जवान भाग नहीं लेंगे। यह प्रतियोगिता आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने व उनका हौसला बढ़ाने आयोजित की गई है। इसमें नक्सल पीड़ित भी शामिल होंगे। तीन दिनों तक चलने वाले बस्तर ओलंपिक में भाग लेने कांकेर जिले से 53 आत्मसमर्पित नक्सली जगदलपुर के लिए बुधवार को रवाना हुए। जिले में कभी मिलिट्री कंपनी नंबर पांच में मुख्य व सक्रिय भूमिका में रहने नक्सली भी शामिल हैं। वे जगदलपुर में आत्मसमर्पित नक्सली व नक्सल प्रभावित लोगों के साथ ही टीम बना खेलों में भाग लेंगे। फिलहाल जगदलपुर रवाना हुए आत्मसमर्पित नक्सलियों में अबतक 4 नक्सलियों का खेल में भाग लेना तय है। अन्य नक्सली वहां पहुंचने के बाद अपनी प्रतिभा के अनुरूप प्रतियोगिता में शामिल खेलों में भाग लेंगे। प्रतियोगिता में टीम खेल में कबड्डी, हॉकी, वॉलीबॉल, रस्साकशी के आयोजन होंगे। व्यक्तिगत खेलों में दौड़, बैडमिंटन, तीरंदाजी, एथलेटिक्स इवेंट के अलावा अन्य पारंपरिक खेलों को शामिल किया गया है। संभावना है कि इसमें से नक्सली कबड्डी, वॉलीबॉल, रस्साकशी व तीरंदाजी में अपना जौहर दिखाएंगे क्योंकि जंगल में रहने के दौरान इन्हीं खेलों को खेलने का इन्हें मौका मिलता था। आत्मसमर्पित नक्सली रामजी व किसकोड़ो एरिया कमेटी के रायजी ने कहा कि जंगल में रोजमर्रा के काम करते थे। खेलने का अवसर नहीं मिला। अब बस्तर ओलंपिक में खेलेंगे। कंपनी नंबर पांच के सक्रिय सदस्य आत्मसमर्पित नक्सली कुंवर सिंह कवाची ने कहा जंगल में साथियों के साथ वॉलीबाल खेलते थे। जंगल में कैंप में मैदान बनाते व बॉल व नेट बाजार से खरीद कर लाते थे। फिट रहने रोज दौड़ लगाते थे। अब मौका मिला है तो बस्तर ओलंपिक में मैदान में खेलेंगे। यहां एक अच्छा अनुभव मिलेगा। आत्मसमर्पित नक्सली डीवीसी मेंबर रह चुके जग्गू गोटा ने कहा कि जब जंगल में रहते थे, तब स्वयं को स्वस्थ्य रखने रोज कसरत करते थे। मनोरंजन के लिए परंपरागत खेल खेलते थे। अन्य खेलों के लिए संसाधन का अभाव था। जगदलपुर में जाकर मेरे अनुरूप जो खेल होगा, उसमें भाग लूंगा। नक्सलियों का संगठन छोड़ यहां आने के बाद अच्छा लग रहा है। अब गांव में जाकर खेती किसानी करना चाहता हूं।


