कोलायत तहसील के गंगा सरोवर कैचमेंट एरिया में खनन माफियाओं ने तीन सालों तक जमकर अवैध खनन और परिवहन किया जिसमें से 23.79 लाख क्यूबिक मी. खनिज की ढेरियां आज भी मौके पर मौजूद हैं। इसमें से 12.10 लाख मीट्रिक टन नीलाम किया जाएगा। गंगापुरा के जल संग्रहण क्षेत्र में अवैध खनन और भंडारण पर किए गए ड्रोन सर्वे से वॉल्यूमेट्रिक एसेसमेंट और खनि अभियंताओं व भू वैज्ञानिकों के निरीक्षण का काम पूरा हो चुका है। ‘भास्कर’ के पास इसकी रिपोर्ट है। मैसर्स गरुड़ सर्वे प्रा. लि. की ओर से खनि अभियंताओं और भू वैज्ञानिकों की मौजूदगी में 25 से 28 नवंबर तक किए ड्रोन सर्वे व डीजीपीएस में सामने आया है कि गंगापुरा, मोटावतान तथा शिव सुथारण में 147 स्टॉक्स में 23.79 लाख क्यूबिक मीटर खनिज क्ले और अन्य खनिज मलबे के मिश्रण के रूप में मौजूद है जो 21 पिट्स से निकाला गया है। इन पिट्स का आयतन 28,82. क्यूबिक मी. है। उसके बाद स्टॉक्स में उपयोगी खनिज का पता लगाने के लिए 2 से 4 दिसंबर तक एमई और बीकानेर व नागौर के भू वैज्ञानिकों ने तकनीकी कर्मचारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण किया। मौके पर खनिज क्ले के साथ ही ओवरबर्डन, मलबा भी चिह्नित किया गया। ड्रोन सर्वे कंपनी की ओर से दिए गए वॉल्यूमेट्रिक आंकड़े को क्रॉस टेली करते हुए 21 नमूने लिए गए। इनका रासायनिक विश्लेषण कराने के लिए खान निदेशालय को भेजा गया है। टीम ने माना है कि कुल मिलाकर मौके पर मौजूद खनिज में से 12,09,613 मीट्रिक टन क्ले का ई-ऑक्शन कर निस्तारण किया जा सकता है। अवैध खनन के 21 पिट्स का निरीक्षण 21 अवैध खनन पिट्स में संयुक्त निरीक्षण पर सामने आया कि बॉल क्ले, फाइबल सेंडस्टोन, कंकर, मुर्रम, व हार्ड फैरूजीनस सेंड स्टोन का खनन हुआ है। पिट्स में अवैध खनन ताजा नहीं है। पूर्व के वर्षों में किया गया है। खनिजों की मोटाई का आकलन नहीं किया जा सका। कुछ पिट्स में अब तक बारिश का पानी भरा है। पूर्व में खान विभाग और राजस्व विभाग की ओर से की गई कार्यवाही पर थानों में मुकदमे दर्ज हैं। खातेदारों और अवैध खननकर्ताओं के विरूद्ध वर्तमान में उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार कार्यवाही की जानी है। खातेदारी निरस्त करने की तैयारी की जा रही है। भास्कर एक्सक्लूसिव – आंखें मूंदे बैठे थे अधिकारी गंगापुरा सरोवर कैचमेंट एरिया में सालों से लगातार अवैध खनन होता रहा। वर्ष, 21 से 23 तक पुलिस थानों में अवैध खनन और निर्गमन के मुकदमे भी दर्ज होते रहे। इस दौरान तत्कालीन कलेक्टर-एसपी मौके पर पहुंचे तो उन्हें भी मशीनों से अवैध खनन होते मिला और गाड़ियां भरी जा रही थी। अवैध खनन से निकले खनिज की ढेरियां लगी थी जो सालों से पड़ी रही। अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहे। माफिया गिरोह के लोग अवैध खनन और निर्गमन करते रहे। अधिकारियों को पता था, उनकी मिलीभगत भी रही। अचानक सरकार सख्त हुई। एमई को निलंबित कर दिया गया। बीकानेर एमई को निलंबित करने की कार्यवाही पहली बार हुई है। माना जा रहा है कि उच्च अधिकारियों और नेताओं से ट्यूनिंग बिगड़ी और खेल सामने आ गया।


