राजस्थान में मकान-दुकान किराए पर देने वाले मालिकों और किराएदारों के लिए बुरी खबर है। अब 11 महीने के जुगाड़ वाले किरायानामे पर पूरी तरह से रोक लग गई है। राज्य सरकार ने रजिस्ट्री कानून में बड़ा संशोधन करते हुए 2 दिसंबर 2025 से हर तरह के किराया एग्रीमेंट की रजिस्ट्री अनिवार्य कर दी है। चाहे आप मकान, फ्लैट, दुकान या जमीन महज एक महीने के लिए ही क्यों न दे रहे हों, अब आपको रजिस्ट्री करानी ही होगी। यह सिर्फ एक नियम नहीं, बल्कि राजस्थान के रियल एस्टेट सेक्टर में आने वाला एक बड़ा बदलाव है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा बोझ डालेगा। पहले मकान मालिक और किराएदार मिलकर रजिस्ट्री फीस बचाने के लिए 11 महीने का किरायानामा बना लेते थे, लेकिन अब यह दांव खेलना मुश्किल हो गया है। कानूनी विवाद होने पर बिना रजिस्ट्री वाला किरायानामा कोर्ट में कोई दम नहीं दिखाएगा और दोनों पक्ष मुसीबत में पड़ सकते हैं। अब अगर आप कोई संपत्ति 11 महीने तक के लिए किराए पर दे रहे हैं, तो आपको स्टाम्प ड्यूटी के रूप में संपत्ति के बाजार मूल्य का 0.02 फीसदी चुकाना होगा। इसके ऊपर रजिस्ट्रेशन फीस के तौर पर इस स्टाम्प ड्यूटी की कुल राशि का 20 फीसदी और देना होगा। इस फैसले से सरकार को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई भी हो जाएगी। सरकार ने रजिस्ट्रेशन (राजस्थान अमेंडमेंट) एक्ट, 2021 के तहत कई बड़े बदलाव किए हैं, जो 2 दिसंबर से लागू हो रहे हैं। आम आदमी को होगा फायदा ये बदलाव एक तरफ लोगों के लिए महंगे साबित हो सकते हैं, लेकिन दूसरी तरफ ये कई बड़ी समस्याओं का स्थायी हल भी हैं। कोर्ट-कचहरी में चलने वाले जमीन विवाद कम होंगे, फर्जी एग्रीमेंट और दोहरी बिक्री पर रोक लगेगी, ई-रजिस्ट्री से दलालों का दखल कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी, सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा-बिक्री रुक सकेगी और एससी-एसटी जमीन की सुरक्षा मजबूत होगी। इसका वित्त विभाग संयुक्त सचिव नथमल डिडेल ने नोटिफिकेशन जारी किया है। ये 8 बदलाव भी आपको जानने ज़रूरी… – हर लीज होगी रजिस्टर्ड: अब एक महीने, तीन महीने या साल भर, किसी भी अवधि के किरायानामे के लिए रजिस्ट्री जरूरी। ग्यारह माह वाली जुगाड़ व्यवस्था खत्म।
– एग्रीमेंट टू सेल बेकार: संपत्ति बेचने का कोई भी समझौता, चाहे उस पर कब्जा दिया गया हो या नहीं, अब रजिस्ट्रेशन के बिना अमान्य होगा।
– बैंक मॉर्गेज हुआ सुरक्षित: बैंक अब गिरवी रखी संपत्ति के दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी तुरंत रजिस्ट्रार को भेजेंगे। फेक मॉर्गेज और डुप्लीकेट डीड का मामला खत्म।
– सरकारी जमीन पर लगी रोक: बिना सक्षम अधिकारी की मंजूरी के नगरपालिका, विकास प्राधिकरण या किसी भी सरकारी विभाग की जमीन खरीदने-बेचने पर पूरी तरह से रोक।
– एससी/एसटी की जमीन पर कड़ी नाकेबंदी: एससी/ एसटी की कृषि भूमि की रजिस्ट्री के लिए या तो खरीदार भी एससी/एसटी या फिर सक्षम अधिकारी से मंजूरी लेना ज़रूरी।
– कॉलोनी में सौदा करने से पहले लेनी होगी मंजूरी: किसी भी कॉलोनाइजेशन क्षेत्र में संपत्ति खरीद बेच से पहले संबंधित विभाग से मंजूरी जरूरी।
– ई-रजिस्ट्री को मिली पूरी मान्यता: दस्तावेज अपलोडिंग से पहचान, फोटो, अंगूठा और हस्ताक्षर तक ऑनलाइन। रजिस्ट्री के समय फोटो, अंगूठा और डिजिटल सिग्नेचर अनिवार्य।


