हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मध्यप्रदेश भवन विकास निगम में मुख्य अभियंता पद पर की गई नियुक्ति पर अंतरिम रूप से रोक लगा दी है। यह आदेश भूपेंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया, जिसमें नियुक्ति की वैधता और पात्रता पर गंभीर आपत्ति उठाई गई थी। न्यायालय ने बताया कि 25 नवंबर 2025 को पारित अंतरिम आदेश में पहले ही निर्देश दिया गया था कि श्रीवास्तव को उस पद पर कार्य करने या अपने दायित्व निभाने की अनुमति न दी जाए, जिसके लिए उनका चयन या नियुक्ति की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि महाप्रबंधक (तकनीकी/सिविल) पद की पात्रता मानकों के अनुसार श्रीवास्तव योग्य नहीं हैं। वहीं श्रीवास्तव की ओर से दलील दी गई कि भवन विकास निगम में महाप्रबंधक (तकनीकी) का पद 19 सितंबर 2024 से 29 अक्टूबर 2025 तक निर्धारित है और नियम पुस्तिका के अनुसार यह पद मुख्य अभियंता के समकक्ष है। इसलिए वे इस पद के लिए पात्र हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने न्यायालय को बताया कि 19 नवंबर 2025 के आदेश में श्रीवास्तव को मुख्य अभियंता के रूप में नियुक्त किया गया है, जबकि वे महाप्रबंधक (तकनीकी/सिविल) पद के उम्मीदवार थे। अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें ऐसे पद पर कैसे नियुक्त किया गया, जो 26 जून 2025 के विज्ञापन का विषय नहीं था। न्यायालय ने विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि किन प्रावधानों के तहत श्रीवास्तव को मुख्य अभियंता के पद पर नियुक्ति और कार्य करने की अनुमति दी गई।


