सांसद महंत ने ‘वंदे मातरम्’ पर छत्तीसगढ़ का शौर्य बताया:कहा, कुछ लोग इतिहास को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत कर रहे हैं

कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत ने संसद में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर हुई चर्चा में हिस्सा लिया। उन्होंने इस गीत को मातृभूमि के प्रति सम्मान से जोड़ते हुए स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के योगदान पर प्रकाश डाला। सांसद महंत ने कहा कि कुछ लोग इतिहास को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत कर रहे हैं। अपने वक्तव्य की शुरुआत में सांसद महंत ने छत्तीसगढ़ की माटी से अपने जुड़ाव को रेखांकित किया। उन्होंने बताया, “मैं उस छत्तीसगढ़ की माटी से आती हूँ जहाँ के आदिवासियों ने ‘वंदे मातरम्’ के उद्घोष के साथ अंग्रेजों का सामना किया था और गोलियाँ भी खाईं।” उन्होंने जोर दिया कि यह उद्घोष आदिवासियों के लिए केवल एक गीत नहीं, बल्कि मातृभूमि की रक्षा के लिए मर मिटने की प्रेरणा था। सांसद महंत ने ‘वंदे मातरम्’ की भावना को वर्तमान संदर्भों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि इस गीत को वास्तविक सम्मान देने का अर्थ देश की समस्याओं को दूर करना है। उनके अनुसार, धरती माँ का सम्मान तभी होगा जब देश को बेरोजगारी, महंगाई और प्रदूषण जैसी समस्याओं से निजात मिलेगी। उन्होंने ‘सुजलाम सुफलाम’ जैसी पंक्तियों का उल्लेख करते हुए प्रकृति की रक्षा पर जोर दिया। सांसद ने कहा कि हमें अपनी नदियों, पहाड़ों, जंगलों और कृषि भूमि की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि धरती माँ अपने बच्चों में भेदभाव नहीं करती, इसलिए सच्ची देशभक्ति में सभी धर्मों और समुदायों के प्रति सम्मान निहित है। ज्योत्सना महंत ने बताया कि वह एक ऐसे परिवार से आती हैं, जहाँ उनके दादाजी और ससुर दोनों स्वतंत्रता सेनानी थे। इस पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व को करीब से समझा है। उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा का भी ज़िक्र किया और कहा कि उन्होंने बिल्कुल सही कहा कि इस चर्चा को महंगाई, बेरोजगारी और वायु प्रदूषण जैसे वास्तविक मुद्दों पर केंद्रित होना चाहिए।

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