अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जोधपुर प्रांत का 60वा प्रांत अधिवेशन का आज पाली के सरस्वती स्कूल में समापन हुआ। अधिवेशन में जोधपुर प्रांत एरिया के करीब एक हजार युवा आए। 5 से 7 जनवरी तक आयोजित इस प्रांत अधिवेशन में छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए तीन प्रस्ताव भी पारित किए गए। इन प्रस्तावों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को मूल स्वरूप में लागू करने, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार एवं राजस्थान का वर्तमान सामाजिक परिदृश्य को लेकर चर्चा हुई। तीनों प्रस्तावों को पारित किया गया जो राजस्थान सरकार को सौंपे जाएंगे। इस अधिवेशन में प्रातः सत्र में अभाविप के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री गोविंद नायक ने पंच परिवर्तन विषय पर अपना भाषण रखा। इस दौरान उन्होंने बताया कि भारत में हाल ही में देश की संस्कृति की रक्षा करना सबसे महत्वपूर्ण विषय के रूप में उभरा है। संभावना से युक्त व्यक्ति हार में भी जीत देखता है और हमेशा संघर्षरत रहता है। इसलिए पंच परिवर्तन उभरते भारत की चुनौतियों का समाधान करने में समर्थ है। उन्होंने कहा कि पंच परिवर्तन में स्व का बोध अर्थात स्वदेशी, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण, सामाजिक समरसता तथा कुटुंब प्रबोधन शामिल है। इन आचरण को अपने स्वभाव में लाने का सतत प्रयास करना होगा। अधिवेशन के समापन समारोह में प्रांत अध्यक्ष डॉ. हीराराम ने वर्ष 2024-25 की प्रांत कार्यकारिणी की घोषणा करते हुए कहा कि जोधपुर प्रांत का यह अधिवेशन ऐतिहासिक अनुभवों का गवाह रहा है। मुझे यह पूर्ण विश्वास है कि यह कार्यकारिणी साल भर विद्यार्थियों की विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए सक्रिय रूप से कार्य करती रहेगी। प्रांत मंत्री पूनम भाटी ने अभाविप के वर्ष भर के कार्यक्रमों की योजना रखते हुए बताया कि विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता वर्ष भर परिसर में छात्र हितों को लेकर लड़ते है तथा समाज में व्याप्त समस्याओं को लेकर भी काम करते है।


