ओडिशा के भुवनेश्वर में आज से तीन दिवसीय 18वां प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन शुरू होगा। इसमें 50 देशों से हजारों प्रवासी भारतीय हिस्सा लेंगे। त्रिनिदाद और टोबैगो की राष्ट्रपति क्रिस्टीन कार्ला कंगालू सम्मेलन की मुख्य अतिथि हैं। वह वर्चुअली सम्मेलन को संबोधित करेंगी। इस साल सम्मेलन का विषय ‘विकसित भारत में प्रवासी भारतीयों का योगदान’ है। कार्यक्रम में रामायण, प्रौद्योगिकी और प्रवासी भारतीयों पर आधारित प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी। रामायण प्रदर्शनी में बताया जाएगा कि कैसे यह महाकाव्य दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में पहुंचा। मुख्य सचिव मनोज आहूजा ने कहा कि सम्मेलन में 5 हजार से ज्यादा प्रवासी भारतीयों के आने की उम्मीद है। भुवनेश्वर, पुरी और जाजपुर में 21 जगहों को चुना गया है। जहां उन्हें ले जाया जाएगा। सम्मेलन का उद्देश्य ओडिशा में इंटरनेशनल टूरिस्ट्स को बढ़ाना है। 3 दिवसीय सम्मेलन, कब क्या होगा… विदेश मंत्रालय के सचिव अरुण कुमार चटर्जी ने बताया- भारतीय प्रवासियों की संख्या 35.4 मिलियन है, जिसमें 19.5 मिलियन भारतीय मूल के लोग और 15.8 मिलियन NRI शामिल हैं। अमेरिका में सबसे ज्यादा 2 मिलियन भारतीय मूल के लोग रहते हैं। जबकि UAE में सबसे ज्यादा 3.5 मिलियन NRI हैं। विदेश मंत्री ओडिशा के मंदिरों में गए
सम्मेलन में शामिल होने के लिए ओडिशा आए विदेश मंत्री एस जयशंकर कई मंदिरों गए। इनमें पुरी में जगन्नाथ मंदिर, कोणार्क में सूर्य मंदिर, भुवनेश्वर में लिंगराज मंदिर और धौली शांति शिवालय शामिल थे।उन्होंने रघुराजपुर कला गांव का भी दौरा किया। पहली बार देश के पूर्वी राज्य में सम्मेलन
इस बार प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन पहली बार देश के पूर्वी हिस्से में हो रहा है। ताकि सरकार की ‘पूर्वोदय’ योजना को आगे बढ़ाने में मदद मिले। यह योजना बिहार, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के विकास के लिए बनाई गई है। कैसे हुई शुरुआत
प्रवासी भारतीय दिवस की शुरुआत जनवरी 2003 में महात्मा गांधी के 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने की घटना को याद करते हुए की गई थी। इस दिन को मनाने का उद्देश्य प्रवासी भारतीयों के योगदान और उनकी उपलब्धियों को पहचानना है।


