युवाओं में हार्ट अटैक और फिर तुरंत मौत से डर का माहौल व्याप्त है। मॉर्निंग वॉक, जिमिंग या डांस करते समय हार्ट अटैक की घटनाएं बढ़ी हैं। वैसे तो इसका सही कारण अभी तक सामने नहीं आया है। डॉक्टर्स का मानना है कि इसका सीधा संबंध जीवनशैली में आए बदलाव और महामारी के दौरान शारीरिक गतिविधियों में कमी से है। उनके मुताबिक हृदय की नसों में ब्लॉकेज रूपी प्लाक जमने की प्रक्रिया जवानी से ही शुरू हो जाती है, जो आगे चलकर जानलेवा साबित हो सकती है। युवाओं में हो रहे हार्ट अटैक में 75 प्रतिशत कारण इन प्लाक का फटना सामने आ रहा है। प्लाक फटने पर तुरंत जमता है खून का थक्का युवाओं में ब्लॉकेज रूपी प्लाक जमना जल्दी शुरू हो रहा है। ये नसों में जगह-जगह जमता है और इससे नसों की दीवारों की अंदरूनी सतह में चिकनापन कम होता जाता है और इसमें से खून को प्रवाहित होने में घर्षण उत्पन्न होता है। एसएमएस के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. दीपक माहेश्वरी और सुवीरा हॉस्पिटल के सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रुद्रदेव पाण्डेय ने बताया कि काेरोना के समय जब फिजिकल एक्टिविटी बहुत कम हो गई तो प्लाक जमने की प्रक्रिया तेज हो गई और नसों के रास्ते जगह-जगह ऊबड़-खाबड़ गए। ऐसे में अब बिना अभ्यास के फिजिकल एक्टिविटी बढ़ा दी तो व्यायाम के दौरान तेज रक्त प्रवाह के घर्षण की वजह से प्लाक वाली खुरदुरी सतह फट जाती है। हमारी प्लेटलेट्स वहां तुरंत थक्का जमाती है और आर्टरी तुरंत ब्लॉक हो जाती है। यही कारण है कि उससे अचानक हार्ट अटैक होता है। कम उम्र में हार्ट इसके लिए तैयार नहीं होता अतः व्यक्ति की तुरंत मौत हो जाती है। पैरामीट्रिक कार्डिएक एमआर से हार्ट डिजीज की समय पर पहचान पैरामीट्रिक मैपिंग कार्डिएक एमआर एक मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एआर आई) तकनीक है, जो हृदय की बारीक संरचना देख सकती है। महाजन इमेजिंग फोर्टिस हॉस्पिटल की सीनियर रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सुमन सिंघल बताती हैं कि सामान्य कार्डिएक एमआरआई जहां मुख्यतः हृदय की संरचना और रक्त प्रवाह की जानकारी देता है। इस तकनीक से हृदय की मांसपेशियों में फाइब्रोसिस, सूजन और दूसरे बदलावों को शुरुआती चरण में ही पहचान सकती है और पहले ही बचा जा सकता है।


