बड़ा फैसला:आखिर जेडीए ने माना 16 साल पहले बना 16 किलोमीटर लंबा बीआरटीएस उपयोगी नहीं; हटाने का प्रस्ताव सरकार को भेजेंगे, मंजूरी मिलते ही तोड़ेंगे

राजधानी में 16 साल पहले बने बीआरटीएस काॅरिडाेर काे जेडीए हटाने की तैयारी में है। न्यू सांगानेर से 200 फीट बायपास, अजमेर राेड से पुरानी चुंगी और सीकर राेड से पानीपेच तक 16 किमी लंबे इस निष्क्रिय काॅरिडाेर को हटाने का प्रस्ताव राज्य सरकार काे भेजने का निर्णय जेडीए ने लिया है। सरकार से मंजूरी मिलते ही जेडीए इस बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) काे हटाएगा। यह निर्णय मंगलवार को जेडीए के मंथन सभागार में जेडीसी आनंदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। मीटिंग में चर्चा हुई कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) 200 फीट बाईपास जंक्शन को ट्रैफिक लाइट फ्री करने अंडरपास बनवा रहा है। इससे एक किमी लंबा कॉरिडोर निष्क्रिय हो जाएगा। राव शेखाजी आरओबी बनने से विद्याधर नगर में भी करीब एक किमी का कॉरिडोर निष्क्रिय हाे गया है। इसके अलावा एनएचएआई सीकर रोड सी जोन बाईपास पर अंडरपास प्रस्तावित है। इससे 1.2 किलोमीटर में कॉरिडोर खत्म हो जाएगा। साथ ही मेट्रो फेज-2 से भी बीआरटीएस प्रभावित होगा। ऐसे में इसे अब पूरी तरह हटाने की प्लानिंग की गई है। 2017 में भास्कर ने वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्‌यूट से करवाई थी बीआरटीएस की जांच, 43 में से 39 पैमानों में फेल हुआ था 2008 में केन्द्र सरकार के सहयाेग से 269 कराेड़ रुपए खर्च कर 16 किमी लम्बा काॅरिडाेर बनाया गया था। यह काॅरिडाेर बनने के साथ ही खामियों से भरा रहा। 2016 में न्यू सांगानेर रोड कॉरिडोर पर जेडीए ने सेफ्टी ऑडिट कराई, इसमें 11 चौराहों पर खामियां मिली। 2017 में भास्कर ने वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्‌यूट से जांच करवाई। इसमें 43 तय पैमानों में से कॉरिडोर 39 पर फेल साबित हुआ। इस काॅरिडाेर के फेल हाेने का सबसे बड़ा कारण इसका अधूरा बनना था। इसके अलावा इसमें बसें नहीं चलने, टिकटिंग व्यवस्था प्रॉपर नहीं थी। काॅरिडाेर बनने के बाद ट्रैफिक जाम की समस्या ज्यादा हाेने लगी। सीआरआरआई की अंतिम रिपाेर्ट आना बाकी, लेकिन सर्वे में फेल रहा : जेडीए ने पिछले साल ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड की बैठक में बीआरटीएस कॉरिडोर काे लेकर चर्चा हुई थी। केन्द्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान काे पत्र भी लिखा था। इसके बाद टीम ने कॉरिडोर का निरीक्षण किया। प्रारंभिक रिपाेर्ट में सामने आया था कि बसें नहीं चलने से 70% लोग इसे हटाने के पक्ष में हैं। काॅरिडाेर 40 किमी का बनना था, लेकिन बाद में आगे नहीं बढ़ाया गया। इसके अलावा रोड साइड पार्किंग नहीं हटाने से ट्रैफिक समस्या ज्यादा हाे गई। इस रिपोर्ट को देखते हुए भी जेडीए ने बीआरटीएस को निष्क्रिय का प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजने का निर्णय लिया है। बैठक में जोन-14 में वाटिका रोड के नवीनीकरण व सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट सहित कई फैसले लिए गए।

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