पुनायता रोड पर खुले में डाल रहे स्लज, पांच साल से सैंपलिंग नहीं, बीमारी फैलने का डर

भास्कर संवाददाता | पाली फैक्ट्रियों के प्रदूषित पानी को ट्रीटमेंट प्लांट में ट्रीट करने के बाद बचने वाले अपशिष्ट स्लज को सीईटीपी फाउंडेशन पुनायता रोड पर खुले में स्टोर कर रहा है। स्लज की क्लोरोफिक, कैडमिन और क्रोमियन के साथ पीएच की जांच की जाती है। ताकि खुले में लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक ना हो। पिछले 5 साल से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सीईटीपी फाउंडेशन द्वारा स्लज के सैंपल की जांच तक नहीं की गई है। आरपीसीबी के अधिकारी भी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। स्लज संग्रहण स्थल पर फाउंडेशन द्वारा एक बोर्ड तक लगाया गया है, जिस पर प्रतिदिन स्लज की क्वांटिटी, एक महीने में कम्युलेटिव स्लज की क्वांटिटी, प्रतिदिन डिस्पोज होने वाले स्लज की क्वांटिटी और अंतिम कुल स्लज की क्वांटिटी का आंकड़ा लिखना होता है, जो नहीं लिखा जा रहा। स्लज यार्ड के चलते यहां से प्लांट 6 तक का पूरा रास्ता स्लेटी कलर का हो गया है। जिससे फैक्ट्री में काम करने के लिए जाने वाले मजदूरों का हाल बेहाल हो गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमानुसार अपशिष्ट स्लज का परिवहन भी नियम 2016 के तहत आरपीसीबी में पंजीकृत वाहनों के द्वारा ही किया जाएगा। इतना ही नहीं ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाला स्लज भी सीईटीपी फाउंडेशन द्वारा खुले में नहीं रखा जा सकता। परिवहन करने वाले कंटेनर पर भी लेबल लगा होना जरूरी है। स्लज को 90 दिन से अधिक अवधि तक इसका यार्ड में भंडारण भी नहीं किया जा सकता। इन नियमों के बावजूद भी सीईटीपी फाउंडेशन द्वारा ना ही स्लज की सैंपलिंग की जा रही है और ना ही इन स्लज को बंद जगह पर स्टोर किया जा रहा है। इस स्लज के फैलने से हवा में उड़ते इसके कणों से मरीज को सांस संबधी बीमारी होने की संभावनाएं रहती है। लेकिन मजदूरों के हित को लेकर कोई भी जिम्मेदार इनकी ओर ध्यान नहीं दे रहा है। ^ स्लज की जांच सीमेंट फैक्ट्री वाले करवाते हैं। वो भी स्लज की कैलोरी की जांच करवाते हैं। स्लज की जांच नहीं होती। बालोतरा में इसे डंप किया जाता है। अभी नया कांट्रेक्ट हुआ है, अब यह सीमेंट कंपनियों में जाएगा। – अशोक लोढा, अध्यक्ष, सीईटीपी फाउंडेशन पाली फैक्ट्रियों के कैमिकल के पानी से निकलने वाले स्लज को स्टोर करने के बाद सीईटीपी फाउंडेशन द्वारा रास की श्री सीमेंट और बालोतरा की रेमकी कंपनी को बेचा जा रहा है। फाउंडेशन के कोषाध्यक्ष प्रवीण कोठारी ने बताया कि शहर में एक महीने में 1500 से 2 हजार टन स्लज यार्ड में एकत्रित होता है। अभी रास के श्री सीमेंट 5 दिन में 300 टन स्लज दिया गया है। पहले बालोतरा के रेमकी कंपनी को स्लज दिया जाता था। रेमकी कंपनी इस स्लज का प्रोसेस कर इसे डिस्पोज करती थी। वहीं सीमेंट कंपनी इसे प्रोसेस कर सीमेंट के काम में लेती है।

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