सोनिया के बर्थडे पर ब्लड डोनेट किया तभी मिलेगा पद:कांग्रेस में जिला अध्यक्ष बनने की 3 शर्तें, जानिए भाजपा-सपा में क्या है क्राइटेरिया

कांग्रेस में जिला, शहर और ब्लॉक कमेटियों में चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सबसे पहले जिला और शहर अध्यक्ष का चयन होगा। इन पदों के लिए कांग्रेस ने क्राइटेरिया तय किया है। दावेदारों से तीन सवाल किए जा रहे। जवाब तय करेंगे कि वे जिला और शहर अध्यक्ष बन पाएंगे या नहीं। पुरानी कमेटियां 2019 में प्रियंका गांधी के यूपी प्रभारी बनने के बाद बनी थीं। 4 दिसंबर की देर रात पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने लेटर जारी करके जिला, शहर और ब्लॉक की सभी कमेटियों को भंग कर दिया था। जिला और शहर अध्यक्ष पद पर दावेदारी के लिए कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे और अजय राय ने सभी जिलों से कम से कम 5 लोगों को बुलाया। इन्हें 3 बिंदुओं पर खुद की दावेदारी पेश करने की शर्तें बताई गईं। जिला और शहर अध्यक्ष बनने के लिए इन 3 शर्तों को पूरा करना होगा- 1- 18 दिसंबर के आंदोलन में शामिल थे या नहीं?
कांग्रेस पार्टी ने पिछले दिनों 18 दिसंबर को विधानसभा घेराव का ऐलान किया था। उस दौरान पूरे प्रदेश से कार्यकर्ता लखनऊ आए थे। कई जगह जिलों में गिरफ्तारी हुई थी। अब जिला और शहर अध्यक्ष पद पर नियुक्ति हो रही है, तो दावेदारों से यह पूछा जा रहा है कि 18 दिसंबर के आंदोलन में उनकी क्या भूमिका थी? कितने लोगों को लेकर वह प्रदर्शन में आए थे। कितने घंटे तक आंदोलन में शामिल रहे। अगर किसी हालत में लखनऊ नहीं पहुंच पाए तो जिले में क्या कहीं विरोध-प्रदर्शन किया। क्या पुलिस ने घर पर हाउस अरेस्ट किया था या नहीं किया था? अंदर चर्चा है कि 18 दिसंबर को पार्टी की तरफ से काफी लंबे समय बाद इस तरह के बड़े आंदोलन की प्लानिंग की गई थी। ऐसे में, जिला स्तर पर अध्यक्ष की नियुक्ति में आंदोलन में शामिल होने और नहीं होने को गंभीरता के साथ देखा जा रहा है। 2- पूर्व पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के जन्मदिन पर ब्लड डोनेट किया या नहीं?
कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सोनिया गांधी का 10 दिसंबर को जन्मदिन होता है। कांग्रेस ने इस दौरान यूपी के सभी जिलों में ब्लड डोनेशन कैंप लगाया था। अब अध्यक्ष पद की दावेदारी करने वाले नेताओं ने उस दिन ब्लड डोनेट किया या नहीं, यह भी देखा जा रहा है। अगर ब्लड डोनेट नहीं किया तो इसका कारण पूछा जा रहा है। उदाहरण के तौर पर हो सकता है किसी ने कुछ दिन पहले ही ब्लड दिया होगा, तो उनको राहत मिलेगी। इसके अलावा कैंप में कितने लोगों को शामिल कराया। उनके माध्यम से कितने लोग ब्लड डोनेट करने पहुंचे, यह सब बताना होगा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने 10 दिसंबर को बनारस में खुद ब्लड डोनेट किया था। ऐसे में, अगर कोई नेता कैंप में हिस्सा नहीं लिया होगा तो उसके लिए माइनस मार्किंग जैसे देखा जाएगा। 3- राजीव गांधी पौधारोपण के दौरान क्या किया?
जून के महीने में कांग्रेस पार्टी ने राजीव गांधी पौधारोपण अभियान शुरू किया था। पूरे प्रदेश में यह अभियान काफी बड़े पैमाने पर चलाया गया था। अब दावेदारों से पूछा जा रहा है कि आपने अभियान के दौरान क्या किया? कितने पौधे लगाए, कितने लोगों को इसके लिए जागरूक किया। जो नेता इस अभियान के दौरान सबसे अच्छा रहा होगा, उसकी दावेदारी मजबूत होगी। 7 जनवरी से शुरू हो चुका है उम्मीदवारों का इंटरव्यू
यूपी प्रभारी और कांग्रेस के महासचिव अविनाश पांडे और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय 7 से 12 जनवरी तक शहर और जिलाध्यक्ष के पदों के दावेदारों का इंटरव्यू लेंगे। कांग्रेस का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व साल 2027 के विधानसभा चुनाव में मजबूती से ताल ठोकने के लिए हर कील कांटा दुरुस्त करने की तैयारी में है। इसकी पहली शुरुआत प्रदेश संगठन में ऐसे लोगों को आगे लाने की तैयारी है, जिनकी जमीन मजबूत हो। जो पार्टी में सक्रिय भूमिका निभा सके। 6 दिन, 6 जोन की बैठकों में चुने जाएंगे जिला और शहर अध्यक्ष
इन पदों पर नई नियुक्तियों के लिए यूपी प्रभारी अविनाश पांडेय 6 जनवरी की शाम ही लखनऊ पहुंच गए। इसके बाद 7 जनवरी से अलग-अलग जोन की बैठकें शुरू हो गईं। 7 जनवरी को पूर्वांचल जोन, 8 जनवरी को प्रयागराज जोन, 9 को अवध जोन, 10 को बुंदेलखंड जोन, 11 को बृज जोन और 12 को पश्चिम जोन की बैठकें होंगी। छह दिनों तक चलने वाली इन मैराथन बैठकों के बाद सभी जोन के शहर और जिलाध्यक्षों के नाम तय होंगे। जानकारी के मुताबिक इसके बाद प्रदेश और ब्लाॅक कमेटी के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्त की प्रक्रिया शुरू होगी। अब जानते हैं प्रमुख कमेटियां, जिन्हें भंग किया गया प्रदेश कार्यकारिणी से लेकर ब्लॉक स्तर की सभी कमेटियां भंग हैं
प्रदेश कार्यकारिणी, जिला, शहर, मंडल और ब्लॉक स्तर की कमेटी को भंग कर दिया गया है। कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने बताया कि नई कमेटी के बनने तक अलग-अलग 46 प्रकोष्ठ के चेयरमैन अपने-अपने पद पर काम करते रहेंगे। नई कमेटी के गठन तक संगठन के 46 प्रकोष्ठ और विभागों के चेयरमैन कार्यवाहक के रूप में कार्य करते रहेंगे। भंग करने से पहले प्रदेश कार्यकारिणी में 16 उपाध्यक्ष, 38 महासचिव और 76 सचिव बनाए गए थे। जिला कमेटी- प्रदेश के बाद जिला और शहर कमेटी गठित होती हैं। इसको बदला जा रहा है, कई कमेटी ऐसी है, जो पिछले 5 साल से नहीं बदली है। संगठन को नए सिरे से खड़ा करने के लिए इनका बदलाव पार्टी ने जरूरी माना है। एक कमेटी में करीब 30 से 35 सदस्य होते हैं। ब्लॉक कमेटी- ब्लॉक स्तर पर भी करीब 650 से ज्यादा कमेटियां हैं। हालांकि इसमें कई जगह पर कमेटी बस कागजों पर चल रही हैं। कांग्रेस का लक्ष्य है कि साल 2027 से पहले इस कमेटी को सबसे ज्यादा मजबूत किया जाए। पिछले एक साल से संगठन में फेरबदल की मांग
17 अगस्त 2023 को प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालने के बाद से ही अजय राय केंद्रीय नेतृत्व से संगठन में फेरबदल की पैरवी कर रहे थे। उनके कार्यभार संभालने के बाद नई कार्यकारिणी का गठन तो हुआ था, लेकिन उसमें सभी पुराने लोग ही थे। लोकसभा चुनाव के नजदीक होने के चलते उस समय फेरबदल नहीं हो सका। लेकिन उपचुनाव के बाद 4 दिसंबर को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणु गोपाल ने कांग्रेस की प्रदेश कमेटी, सभी जिला, शहर और ब्लॉक कमेटी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय का कहना है कि यूपी प्रभारी अविनाश पांडे के नेतृत्व में चयन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस दौरान प्रमुख तीन बिंदुओं पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाएगा, जिनमें 18 दिसंबर को प्रदेश स्तर पर विधानसभा के हुए घेराव में नेताओं की भूमिका। 10 दिसंबर को पूरे प्रदेश में हुए ब्लड डोनेशन कैंप में उनकी सहभागिता और जून के महीने में पौधारोपण अभियान के दौरान की सक्रियता देखी जाएगी। अब जानिए दूसरी राजनीतिक पार्टियों में पदाधिकारी कैसे चुने जाते हैं?
सबसे पहले बात बीजेपी की करें तो जिला और शहर अध्यक्ष नेताओं के पसंद से चुने जाते हैं। हालांकि, इनकी नियुक्ति में भी पार्टी के कामों में इनकी भागीदारी देखी जाती है। लेकिन यह कोई तय नियम की तरह नहीं होता है। प्रदेश की दूसरी बड़ी पार्टी सपा में प्रत्याशियों के चयन के दौरान भी आंदोलनों में उनकी भूमिका और भागीदारी पूछी जाती है। इस दौरान कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी भी तय होती है। हालांकि जिला अध्यक्ष या संगठन के अन्य पदों पर चयन राष्ट्रीय अध्यक्ष के अनुमति से प्रदेश अध्यक्ष कर देता है। ———————————— ये भी पढ़ें: अयोध्या में हार का बदला मिल्कीपुर जीतकर लेगी भाजपा:अखिलेश के सामने गढ़ बचाने की चुनौती, नतीजों का पूरे देश में जाएगा मैसेज रामनगरी अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो गई है। पांच फरवरी को वोटिंग और 8 फरवरी को रिजल्ट आएगा। राजनीतिक दलों और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर दिल्ली विधानसभा चुनाव के साथ मिल्कीपुर के उपचुनाव पर भी रहेगी…(पढ़ें पूरी खबर)

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