मुफ्त राशन योजना की बदौलत प्रदेशभर के विभिन्न जिलों में 4.5 करोड़ गरीबों के लिए भी खाद्य सामग्री सुरक्षित हो गई है । हालांकि पहले अलग-अलग जिलों में खाद्य सामग्री हासिल करने के मामले में काफी अंतर नजर आता था। जयपुर, कोटा तथा जोधपुर के लोगों के लिए खाद्य सामग्री हासिल करना आसान था, तो जालौर, प्रतापगढ़ तथा बांसवाड़ा के लोगों के लिए इससे मुश्किल । ऐसा गरीबी की वजह से था। जबकि प्राकृतिक तौर पर खाद्य सामग्री की उपलब्धता के मामले में जयपुर 33 जिलों (पुरानी व्यवस्थानुसार) में 24वें स्थान पर है और कोटा 22वें पर। फ्रंटियर्स मीडिया द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट बताती है कि खाद्य सामग्री की उपलब्धता के मामले में प्रदेश में बारां, गंगानगर तथा झालावाड़ सबसे बेहतर स्थिति में हैं। वहीं डूंगरपुर, सिरोही तथा बांसवाड़ा में प्रति व्यक्ति के लिहाज से खाद्य सामग्री की उपलब्धता सबसे कम है। यह शोध रिपोर्ट बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (लखनऊ) के अर्थशास्त्र विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्र एवं नीति अनुसंधान संस्थान (नई दिल्ली) द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई है। 2019 तक के आंकड़ों पर आधारित यह शोध बताती है कि बारां में प्रति व्यक्ति अनाज, तिलहन, मसाले, सब्जियां, फल, दूध तथा अंडे डूंगरपुर की तुलना में काफी ज्यादा हैं। बारां जिले में प्रति व्यक्ति अनाज की उपलब्धता 81 किलोग्राम सालाना सामने आई, जबकि डूंगरपुर जिले में यह केवल 21 किलोग्राम सालाना ही आंकी गई। जिले जिनमें खाद्य सामग्रियों की उपलब्धता सबसे ज्यादा रिपोर्ट में अनाज, तिलहन, मसाले, फल-सब्जी, दूध, अंडे तथा मांस को संकेतक के तौर पर रखकर एक सूचकांक तैयार किया गया है। जो बताता है कि किसी व्यक्ति के लिए सालभर में कहां-कितने किलोग्राम खाद्य समग्री उपलब्ध है। इसी आधार पर जिलों की रैंकिंग की गई है। जहां, जितना पानी, वहां वैसे हालात, दूध भी इसी से कम रिपोर्ट में बताया गया है कि तिलहन की उपलब्धता में भी बारां प्रतिव्यक्ति सालाना 137 किलोग्राम रहा है, तो सिरोही 8 किलोग्राम ही रहा। इसी तरह फलों तथा सब्जियों की उपलब्धता (प्रतिव्यक्ति) सीकर में सबसे ज्यादा बताई गई है। दूसरी तरफ डूंगरपुर, बांसवाड़ा, राजसमंद, पाली, उदयपुर, भीलवाड़ा तथा दौसा में सबसे कम। वहीं दूध की उपलब्धता गंगानगर में सर्वाधिक है तो कोटा में सबसे कम। शोधकर्ताओं का मानना है कि पानी की उपलब्धता में अंतर इन जिलों में खाद्य सामग्री में अंतर की बड़ी वजह है। कई बार अपर्याप्त पानी की वजह से किसान गेहूं व चावल जैसी फसलें न उगाने का फैसला लेता है। इसका असर पशुओं के दूध पर भी पड़ता है।


