पिण्डवाड़ा क्षेत्र में मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना का विरोध लगातार बढ़ रहा है। भारतीय किसान संघ ने शुक्रवार को स्वरूपगंज में एक बैठक के बाद मुख्यमंत्री के नाम उप-तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर इस परियोजना को तत्काल रद्द करने की मांग की। स्वरूपगंज कस्बे में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी और क्षेत्रभर के किसान शामिल हुए। बैठक में किसानों के सामने मौजूद चुनौतियों, उनके अधिकारों और आजीविका पर खनन परियोजना के संभावित प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रस्तावित खनन परियोजना को तुरंत निरस्त करने की मांग
ज्ञापन में पिण्डवाड़ा क्षेत्र की 4 ग्राम पंचायतों— वाटेरा, भीमाना, भारजा और वाटेरा की लगभग 3200 बीघा भूमि पर प्रस्तावित खनन परियोजना को तुरंत निरस्त करने की मांग की गई। संघ ने बताया कि इस क्षेत्र की 75 प्रतिशत भूमि निजी खातेदार किसानों की है, जहां कृषि और पशुपालन ही वर्षों से आजीविका का मुख्य आधार रहा है। किसान संघ ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि संबंधित क्षेत्र में लगभग 60 प्रतिशत आबादी आदिवासी समाज की है। इस खनन परियोजना से उनकी जीविका, जलस्रोतों, खेती योग्य भूमि और घरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है। किसानों का कहना है कि खनन गतिविधियों से न केवल पर्यावरण को भारी क्षति पहुंचेगी, बल्कि स्थानीय परिवारों का विस्थापन भी हो सकता है, जिससे ग्रामीणों के सामने रोजगार और जीवनयापन का संकट खड़ा हो जाएगा। कंपनी पर किसानों से सहमति नहीं लेने का आरोप
किसान संघ ने आरोप लगाया कि कंपनी द्वारा प्रस्तावित खनन क्षेत्र में किसानों की सहमति के बिना कार्यवाही आगे बढ़ाई जा रही है। कई किसानों ने बताया कि उन्हें न तो उचित जानकारी दी गई और न ही किसी जनसुनवाई में वास्तविक स्थिति को स्पष्ट किया गया। किसानों ने सरकार से इस परियोजना को तुरंत रद्द करने की मांग की। ज्ञापन में यह भी बताया गया कि क्षेत्र में अवैध खनन माफिया सक्रिय हैं, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का तेजी से दोहन हो रहा है और कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। संघ ने जिला एवं राज्य प्रशासन से ऐसे माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई करने और अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।


