श्री अहिल्योत्सव समिति इंदौर ने इस वर्ष का देवी अहिल्या पुरस्कार श्री रामजन्म भूमि मुक्ति आंदोलन के ज्ञात-अज्ञात कारसेवकों और मंदिर निर्माण के सहभागियों को समर्पित करने का निर्णय लिया है। समारोह का आयोजन 13 जनवरी को लता मंगेशकर ऑडिटोरियम में सायं 5.30 बजे होगा। जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री चंपत राय को यह पुरस्कार प्रदान करेंगे। चंपत राय को यह पुरस्कार दिए जाने का कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने विरोध जताया है। केके मिश्रा ने एक्स पर लिखा- इस वर्ष का यह गरिमामयी पुरस्कार अयोध्या राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र के आर्थिक मामलों में विवादास्पद, निर्माण में भ्रष्टाचार की गंध और भूमि खरीदी में घोटालों के कथित आरोपों में उलझे महामंत्री चंपत राय को दिया जाएगा। क्या पुण्यश्लोका कभी भी किसी भ्रष्टाचारियों भी ‘संरक्षिका’ रहीं? क्या उन्होंने विवादास्पद चरित्रों का कभी भी पोषण किया? क्या उनके ‘न्याय दंड और शंकर ऑर्डर’ से कोई भी गलत व्यक्ति लाभान्वित हुआ। यदि नहीं तो आप पुण्य श्लोका के नाम पर पुरस्कृत होने वाले इस नाम पर कृपा कर पुनर्विचार कीजिए। आप संघ प्रमुख मोहन भागवत को यह सम्मान दे दीजिए, कोई असहमति नहीं होगी। कम से कम उनके सामाजिक और सार्वजनिक जीवन पर तो कोई दाग नहीं है। यदि चंपत राय को इस सम्मान से नवाज दिया गया तो अगले पुरस्कार का दावा ‘चम्पू अजमेरा’ भी कर सकता है? केके मिश्रा ने कहा- स्पष्ट कर देना चाहूंगा कि सदैव मूल्यों, सिद्धांतों की राजनीति कर गरिमामयी लोकसभा अध्यक्ष के रूप में हमें, हमारे प्रदेश को गौरवान्वित करने वाली ‘ताई’ (सुमित्रा महाजन) को मैं ‘आई’ (मां) के रूप में ही देखता हूं। विपरीत विचारधारा की राष्ट्रीय धरोहर होने के बाद भी वे मेरी ‘आदर्श नेता’ हैं। उन्होंने भ्रष्ट और धंधेबाज राजनीति के दौर में भी अपनी ही पार्टी के भीतर और बाहर सदैव बेखौफ होकर सत्य का साथ दिया है। लिहाजा, वे मेरी ‘आई और आदर्श नेता’ के रूप सदैव स्थापित थी, हैं और रहेगी। मैं आज अपने भी सिद्धांतों को लेकर अपनी ही ‘आई’ के निर्णय पर ‘असहमति के स्वर’ दर्ज कर रहा हूं। हम व्यक्ति को नहीं, उनके काम को सम्मान दे रहे इधर, केके मिश्रा के बयान पर सुमित्रा महाजन ने कहा कि मिश्रा को पता नहीं है चंपतराय का क्या योगदान है, हम व्यक्ति को नहीं, उनके काम को सम्मान दे रहे हैं। अहिल्या बाई पूरे शासन काल में मंदिरों का निर्माण और जीर्णोद्धार करती रहीं। राम मंदिर के लिए दशकों से संघर्ष करने वालों के प्रतिनिधि के रूप में चंपत राय का सम्मान के लिए चयन किया। दिवंगत, ज्ञात-अज्ञात समस्त कार सेवकों की तरफ से वे ही ग्रहण करेंगे। चंपत राय वर्षों से मंदिर मामले से जुड़े हैं, खुद को चौकीदार मानते हैं। मंदिर निर्माण तो विश्व के सभी राम भक्तों की श्रद्धा से हो गया। अब तक 21 व्यक्तियों को मिल चुका है पुरस्कार इस पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1996 में की गई थी। पहला पुरस्कार 1996 में नानाजी देशमुख को तत्कालीन प्रधान मंत्री अटलबिहारी वाजपेयी द्वारा प्रदान किया गया था। अभी तक 21 व्यक्तित्व को यह पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है। पुरस्कार प्राप्त करने वालों में राजमाता सिंधिया, पांडुरंग शास्त्री आठवले, पद्मश्री डॉ. रघुनाथ अनंत माशलेकर, सुधा मूर्ति, साध्वी ऋतम्भरा, डॉ. प्रणव पंड्या प्रमुख हैं। पुरस्कार प्रदान करने वालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कल्याण सिंह, डॉ मुरली मनोहर जोशी, स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज, सुषमा स्वराज और शिवराज सिंह चौहान जैसे व्यक्तित्व सम्मिलित हैं।


