स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति मिशन 12 जनवरी से शुरू होगा‎:दूध की प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के लिए मप्र में होगा ‌1500 करोड़ रुपए का निवेश

मप्र सरकार 12 जनवरी को युवा दिवस पर प्रदेश में स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति मिशन शुरू करने जा रही है। इसके साथ ही प्रदेश में दूध उत्पादन दोगुना करने के लिए राज्य सरकार पांच साल में 1500 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। मंगलवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इन दोनों प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई। युवा शक्ति मिशन के जरिए प्रदेश में सभी तरह की यूथ ओरिएंटेशन एक्टिविटीज को एक मंच पर लाया जाएगा। ताकि में युवा आबादी का समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास किया जा सके। तकनीकी शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार और खेल एवं युवा कल्याण विभाग मिलकर इस मिशन को संचालित करेंगे। गौरतलब है कि सीएम मोहन यादव ने स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेश में चार मिशन अन्नदाता कल्याण, युवा शक्ति, नारी शक्ति और गरीब कल्याण लागू करने का एेलान किया था। युवा शक्ति मिशन उन्हीं में से एक है। इसका उद्देश्य युवाओं में आत्म-विश्वास निर्माण, प्रतिस्पर्धा के लिए तैयारी के साथ उनकी स्किल अपग्रेडेशन और प्रतिभाओं के निखारने वाली गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इस मिशन में संवाद, सामर्थ्य और समृद्धि तीन घटक होंगे, सभी गतिविधियों को इन तीन घटकों में बांटा जाएगा। ये होंगे मिशन के 3 अहम लक्ष्य अब देश भर में बिकेंगे सांची ब्रांड के उत्पाद केबिनेट ने एमपी स्टेट को-ओपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड एवं संबद्ध दुग्ध संघों के राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के बीच होने वाले कोलेबोरेशन एग्रीमेंट को अपनी सहमति दे दी है। इसे मंजूरी देने के पीछे तर्क दिया गया है कि इससे मप्र में दूध उत्पादन करने वाले किसानों की आमदनी दोगुनी हो सकेगी। दूध उत्पादन बढ़ेगा, सहकारी स्तर पर दूध का कलेक्शन बढ़ेगा। सांची ब्रांड की राष्ट्रीय स्तर पर मार्केटिंग की जा सकेगी। नगरीय विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने केबिनेट के फैसलों के जानकारी देते हुए बताया कि हर गांव से दूध की खरीदी और किसानों को सही दाम दिलाना के लिए हर ग्राम पंचायत में दूध कलेक्शन सेन्टर स्थापित किए जाएंगे। दुग्ध संघों की प्रोसेसिंग क्षमता को बढ़ाया जाएगा। साल में लगभग 1500 करोड़ का निवेश होगा। दुग्ध समितियों की संख्या 6 हजार से बढ़ाकर 9 हजार की जाएगी। दूध संकलन 10.50 लाख किलो से बढ़ाकर 20 लाख किलो करने का लक्ष्य पूरा किया जाएगा। वर्तमान में दूध उत्पादकों की कुल सालाना आय 1700 करोड़ रुपए है, जिसे 2028 तक दोगुना कर 3500 करोड़ रु. तक ले जाने का लक्ष्य है।

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