बड़वानी में दिगंबर जैन समाज द्वारा आचार्य श्री 108 विनम्र सागर जी महाराज का 16वां आचार्य पदारोहण दिवस धूमधाम से मनाया गया। यह आयोजन दिगंबर जैन मंदिर में हुआ। आचार्य श्री विनम्र सागर जी को 15 वर्ष पूर्व 12 दिसंबर 2010 को राष्ट्रसंत गणाचार्य विराग सागर जी गुरुदेव द्वारा आचार्य पद से विभूषित किया गया था। इस अवसर पर लगभग 75 साधु-संतों और हजारों श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति थी। आचार्य श्री विनम्र सागर जी का जन्म मध्य प्रदेश के भिंड में श्रावक मेरू चंद जी और चमेली देवी के यहां हुआ था। उन्होंने लौकिक शिक्षा में एम.कॉम में गोल्ड मेडल प्राप्त किया और शासकीय अध्यापक के रूप में भी कार्य किया। आचार्य श्री विराग सागर जी के दर्शन के बाद उन्होंने भौतिक जीवन त्याग कर वैराग्य का मार्ग अपनाया। द्रोणगिरी में उन्होंने जैनेश्वरी दीक्षा लेकर एलक विनम्र सागर का पद ग्रहण किया। 8 जून 2003 को ललितपुर में आचार्य श्री विराग सागर जी ने उनकी साधना, समर्पण और अध्यापन को देखते हुए उन्हें मुनि दीक्षा प्रदान की। विनम्र सागर जी ने भक्तामर शिविर, पूजन, विधान, योग शिविर और पंच कल्याणक जैसे आयोजनों के माध्यम से कई आत्माओं को आत्म-कल्याण के मार्ग पर अग्रसर किया, जिससे वे जन-जन के प्रिय गुरु भगवंत बने। इस अवसर पर आचार्य श्री विनम्र सागर जी ने अपने दीक्षा और शिक्षा गुरु भगवंत आचार्य श्री विराग सागर को स्मरण किया और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने ‘जीवन है पानी की बूंद’ नामक महाकाव्य के लगभग नौ सौ छंदों की रचना भी की है। अगले पल का भरोसा नहीं धर्म सभा में आचार्य श्री ने बड़वानीवासियों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि जो करना है, उसे आज ही कर डालो, क्योंकि अगले पल और कल का कोई भरोसा नहीं। उन्होंने आहार दान की महिमा और महत्व को भी बताया, कहते हुए कि पूजन करने से कषाय बढ़ती है, जबकि आहार देने से कषाय मंद होती है।


