मप्र में जल जीवन मिशन के तहत मुख्यमंत्री के गृह जिले उज्जैन के 14 गांवों में भी गड़बड़ियां सामने आई हैं। केंद्र की हालिया रिपोर्ट कहती है कि उज्जैन जिले के इन गांवों में पानी के कैमिकल टेस्टिंग के सैंपल भी फेल हो गए हैं। यही हाल खुद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) मंत्री समपतिया उइके के गृह जिले मंडला का भी है। उनके ही विभाग द्वारा पूरी की जा रही हर घर नल योजना के तहत मंडला जिले के 6 गांव में भी पानी के कैमिकल टेस्टिंग के सैंपल फेल हो गए हैं।
पूरे मप्र के गांवों में पानी साफ करने के उपकरणों की बेवजह खरीदी के बाद आई केंद्र सरकार की हालिया रिपोर्ट में सबसे ज्यादा रतलाम जिले के 23 और शाजापुर जिले के 22 गांवों में कैमिकल टेस्टिंग में पानी के सैंपल फेल हुए हैं। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, कटनी, मंदसौर, झाबुआ और खरगौन जिलों में तो इस टेस्टिंग में 18-18 गांवों के सैंपल खरे नहीं उतरे हैं। केंद्र सरकार ने एक निजी एजेंसी से मप्र के 1271 सर्टिफाइड गांवों में जल जीवन मिशन में हुए कामों की जांच करवाई थी। ऐसा इसलिए भी किया गया, क्योंकि 2024 तक इस योजना के तहत काम पूरा नहीं होता दिख रहा था। ये जांच जुलाई महीने में करवाई गई, जब वर्षाकाल होने के कारण भू-जल स्तर काफी ठीक रहता है। इन गांवों में कागज में मिले नल कनेक्शन: प्रदेश के छिंदवाड़ा, दतिया, कटनी, मुरैना, रतलाम, रीवा, सिंगरौली, उमरिया, विदिशा जिलों के 16 गांवों में नल कनेक्शन ही नहीं मिले हैं। हालांकि, पीएचई के इंजीनियर्स ने अपनी रिपोर्ट में इन गांवों में नल कनेक्शन देना बताया है। इनमें सिंगरौली जिले के 3 और कटनी जिले के 2 गांव शामिल हैं।


