मुरारी सिंह | हजारीबाग झारखंड के सभी जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। प्राइवेट स्कूल के विद्यार्थी इनर और स्वेटर पहनकर स्कूल पहुंच रहे हैं। सरकारी स्कूल के आधे से अधिक विद्यार्थी बिना स्वेटर ठंड की मार झेलते हुए स्कूल पहुंचते हैं। पहली से आठवीं और नवीं से 12वीं के विद्यार्थियों को समग्र शिक्षा अभियान से हर साल पोशाक मिलता है। इसको लेकर अभिभावक स्वयं से विद्यार्थियों के लिए स्वेटर नहीं खरीदते। अभियान से मिलने वाले पैसे से पोशाक और स्वेटर की खरीद होती है। पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों के पोशाक की राशि विद्यालय प्रबंधन समिति को भेजा जाता है। प्रबंधन समिति पोशाक स्वेटर की खरीद कर विद्यार्थियों को वितरित करता है। नवीं से 12वीं के बच्चों के पोशाक की राशि राज्य स्तर से डीबीटी किया जाता है। तीसरी से आठवीं के विद्यार्थियों के पोशाक की राशि उनके खाते में डीबीटी किया जाता है। जिन बच्चों का खाता नहीं है या खाता में पैसा जाने में परेशानी होती है, उनके अभिभावकों का खाता नंबर स्कूल से मंगवा कर उसमें रकम डीबीटी किया जाता है। अभी तक किसी स्कूल ने पहली दूसरी कक्षा वाले विद्यार्थियों के लिए स्वेटर की खरीद नहीं की है। जिला और प्रखंड स्तर के शिक्षा पदाधिकारी ने खरीद को लेकर किसी तरह का दिशा निर्देश विद्यालयों को नहीं भेजा है। पिछले साल हजारीबाग में पोषक घोटाला हुआ था इसको लेकर सभी डरे हुए हैं। झारखंड शिक्षा परियोजना, हजारीबाग के प्रभारी अकाउंट ऑफिसर संजय राणा ने बताया कि पहली दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों की राशि स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के खाते में भेजी गई है। तीसरी और उससे ऊपर के कक्षाओं के बच्चों के लिए पोशाक की राशि खाते में डीबीटी करने के लिए बैंक को भेजा गया है। जिन विद्यार्थियों का पैसा किसी कारण बस नहीं जा पाएगा उनके अभिभावकों के खाते में रकम डाली जाएगी।


