जालौर में राजपूत समाज के मकान तोड़ने का मामला:हाई कोर्ट ने लगाई कार्रवाई करने पर रोक, कोर्ट ने जारी किए विभाग को नोटिस

राजस्थान हाई कोर्ट ने जालौर जिले में राजपूत समाज के लोगों के मकान तोड़ने पर रोक लगा दी है कोर्ट में आज इस मामले को लेकर सुनवाई की गई थी जिसमें लक सिंह देवी सिंह और मोहन सिंह की ओर से याचिका दायर की गई थी इस मामले में याचिका कर्ता की ओर से निखिल भंडारी ने पैरवी की। कोर्ट ने ग्राम डूड़सी, जिला जालोर के निवासी लख सिंह, देवी सिंह व मोहन सिंह ने राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर में एक रिट याचिका तथा स्थगन प्रार्थना-पत्र अपने एडवोकेट निखिल भण्डारी के मार्फत पेश किया थ। एडवोकेट निखिल भण्डारी ने बहस करते हुए हाईकोर्ट को यह बताया कि प्राथीगण पीढ़ीयों से ग्राम डूड़सी के खसरा नम्बर 655 में पिछले 60 वर्षों से निवास कर रहे हैं। उनके पास जमीन की जमाबन्दी तथा नक्शा भी मौजूद हैं। वे भूमि की बीगोड़ी/टैक्स भी सम्बन्धित विभाग में जमा कराते हैं, जिसकी सनद भी जारी हो चुकी हैं। एडवोकेट निखिल भण्डारी ने बहस करते हुए यह भी बताया कि उन्होंने प्राथीगण की रिट याचिका के साथ प्राथीगण के पुराने पक्के मकान के फोटो भी प्रस्तुत कर रखे हैं, लेकिन जालोर तहसीलदार, उपखण्ड अधिकारी व जिला कलेक्टर प्राथीगण के निर्माण तोड़कर उन्हें बेघर व बेकब्जा करना चाहते हैं, जो कि अनुचित व अवैध हैं।एडवोकेट निखिल भण्डारी ने हाईकोर्ट से यह अनुरोध किया कि अप्राथीगण को ऐसा करने से रोका जावें। राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विनीत कुमार माथुर ने एडवोकेट निखिल भण्डारी के तर्कों से सहमत होते हुए अप्राथीगण को नोटिस जारी कर लख सिंह, देवी सिंह व मोहन सिंह के मकान व निर्माण को तोड़ने व उन्हें बेकब्जा करने पर तुरन्त प्रभाव से रोक लगा दी।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *