शहडोल में जिला पंचायत बैठक में अफसरों पर तीखे सवाल:बोले- एजेंडा लिखे जाते हैं, काम क्यों नहीं; CEO बोले- अब मिनट्स बनेंगे, लापरवाही नहीं होगी

शहडोल में जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों पर तीखे सवाल उठाए। बैठक की शुरुआत सामान्य रही, लेकिन जल्द ही माहौल गरमा गया। सदस्यों ने आरोप लगाया कि बैठकें तो होती हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। निर्माण समिति के सभापति जगन्नाथ शर्मा ने सबसे पहले अपनी बात रखी। उन्होंने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) शिवम प्रजापति से पूछा कि सामान्य सभा की बैठकें नियमित क्यों नहीं होतीं और जब होती हैं, तो सिर्फ कोरम पूरा करने के लिए क्यों? शर्मा ने यह भी कहा कि सदस्य एजेंडा लिखवाते हैं, अधिकारी उसे नोट कर लेते हैं, लेकिन अगली बैठक तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती। सीईओ शिवम प्रजापति ने जवाब दिया कि बैठक के मिनट्स तैयार कराए जा रहे हैं और सभी एजेंडों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उनके इस जवाब से सदस्यों का असंतोष कम नहीं हुआ। बीपीएल परिवार को 57 हजार का बिजली बिल, सुनवाई नहीं सभापति ने बिजली विभाग पर सवाल उठाते हुए कहा कि हरदी गांव के एक बीपीएल कोल परिवार को 57 हजार रुपए का बिजली बिल थमा दिया गया है। उन्होंने बताया कि कई बार किराया देकर परिवार के सदस्यों को बिजली दफ्तर भेजा गया, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। सभापति ने खैरहा के लक्ष्मण कोल के घर भी 54 हजार रुपए का बिल भेजने का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि दोनों परिवारों की बिजली काट दी गई है और वे दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। सभापति ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वह इस मुद्दे को 10 बार सामान्य सभा में उठा चुके हैं, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीण रास्तों का संकट, जमीन अधिग्रहण की मांग इसके बाद जिला पंचायत सदस्य दुर्गेश तिवारी ने ग्रामीण रास्तों की समस्या उठाई। उन्होंने कहा कि मजरे-टोले बढ़ने के कारण अब गांवों में निकलने के लिए रास्ते नहीं बचे हैं। तिवारी ने मांग की कि सरकार जमीन अधिग्रहण कर रास्ते बनवाए और प्रभावित लोगों को मुआवजा दे। इस पर सीईओ सीमा प्रजापति ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर अभी कोई नियम नहीं है। उन्होंने कहा कि शासन से आदेश आने के बाद ही इस संबंध में कुछ किया जा सकेगा। एजेंडा लिखने से आगे भी कुछ होगा? बैठक के दौरान अन्य सदस्यों ने भी अलग-अलग मुद्दों पर सवाल उठाए। संवाद बार-बार इसी बात पर आकर टिकता रहा क्या एजेंडा सिर्फ लिखने के लिए है? अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि अब ऐसा नहीं होगा और हर मुद्दे पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि बैठक खत्म होने तक सदस्यों की नाराजगी साफ झलकती रही।

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