झारखंड चैंबर के एफएमसीजी एंड ड्यूरेबल ट्रेड उप समिति की बैठक बुधवार को हुई। इसमें कंपनियों द्वारा बिना एनओसी दिए और क्लेम सेटलमेंट के बगैर डिस्ट्रीब्यूटर्स को काम सौंपने की गतिविधियों पर सदस्यों ने चिंता जताई। कहा कि बिना सेटलमेंट कर नए डिस्ट्रीब्यूटर बनाने से अनावश्यक विवाद उत्पन्न हो रहा है। डिस्ट्रीब्यूटर्स कैसे एग्रीमेंट करें, पेपर वर्क साइन करने से पहले किन बातों का ध्यान रखें, रिकॉर्ड कीपिंग कैसे करें, ताकि आगे समस्या होने पर चैंबर सहायता कर सके। बैठक में अवेयरनेस प्रोग्राम करने की भी सहमति बनी। चैंबर अध्यक्ष परेश गट्टानी ने इस मामले में कंपनियों से आवश्यक समन्वय बनाकर कार्रवाई की बात कही। डिस्ट्रीब्यूशनशिप व्यापार में आ रही कठिनाइयों पर चिंता जताई गई। रौनक पोद्दार ने कहा कि एफएमसीजी व्यवसाय से जुड़ीं बहुराष्ट्रीय कंपनियां बड़े-बड़े मॉल को अधिक मार्जिन उपलब्ध कराती हैं, जबकि व्यवसायिक उद्योग के परंपरागत डिस्ट्रीब्यूटर जो छोटे-छोटे दुकानों तक माल पहुंचाते हैं, उनकी अपेक्षा बहुत कम मार्जिन देती हैं। इसका डिस्ट्रीब्यूटर व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। बैठक में संजय अखौरी, राहुल साबू, ज्योति कुमारी, विकास विजयवर्गीय, नवजोत अलंग, रोहित व अन्य मौजूद थे। ई-कॉमर्स कंपनियों पर जल्द हो नियंत्रण ई-कॉमर्स कंपनियों की मनमानी से देश के परंपरागत खुदरा व्यापार का स्तर दिन प्रतिदिन गिरने पर भी सदस्यों द्वारा चिंता जताई गई। सरकार द्वारा ई-कॉमर्स कंपनियों की मनमानी पर जल्द नियंत्रण बनाने की पहल होनी चाहिए। सदस्यों ने राज्य सरकार से एमएसएमई की तर्ज पर डिस्ट्रीब्यूटरिशप व्यापारियों को शहर से बाहर औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम दर पर भूमि उपलब्ध कराने की मांग की।


