ज्ञान के साथ हुनरमंद बनाना एनईपी का है मुख्य उद्देश्य झारखंड के विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के सिलेबस के अनुसार चार वर्षीय स्नातक कला, विज्ञान और वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई हो रही है। एनईपी लागू करने का मुख्य उद्देश्य छात्रों को ज्ञान के साथ स्किल्ड करना था, ताकि पढ़ाई के बाद रोजगार या स्वरोजगार में परेशानी न हो। इसे देखते हुए रोजगार कौशल मॉड्यूल को व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का अनिवार्य हिस्सा बनाया गया। पर सिलेबस में आधा दर्जन ऐसे विषय है, जिसे पढ़ाने के लिए राज्य के किसी भी विश्वविद्यालय में एक भी शिक्षक नहीं हैं। किसी विश्वविद्यालय में इन विषयों की क्लास भी संचालित नहीं की जाती। कुछ विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के नाम पर छात्रों को बस स्टडी मैटीरियल बांट दिए जाते हैं। गौरतलब है कि राज्य के सभी नौ सरकारी विश्वविद्यालयों में करीब 2.50 लाख स्टूडेंट्स हर साल एडमिशन लेते हैं। 50 अंकों की होती है इन विषयों की परीक्षा स्नातक स्तर पर स्टैंडिंग इंडिया, ग्लोबल लीडरशिप, एनालिटिकल स्कील, ईवीएस, इंडियन नॉलेज सिस्टम, ईवीएस और डिजिटल एजुकेशन सिस्टम अनिवार्य विषय है। उपरोक्त प्रत्येक विषयों में 2 क्रेडिट की पढ़ाई होती है। वहीं 50 अंक की परीक्षा आयोजित की जाती है। इन विषयों में शिक्षकों की नियुक्ति जरूरी नई शिक्षा नीति में ज्ञान के साथ कौशल पर बल दिया गया है। इसमें कई नए विषयों को शामिल किया गया है। पर इन विषयों में एक्सपर्ट शिक्षक नहीं है। इन विषयों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर पहल करने की जरूरत है। ताकि एनईपी के उद्देश्यों को हासिल कर सकें। -डॉ. एसएम अब्बास, एसोसिएट प्रोफेसर, एंथ्रोपोलॉजी इन विषयों को पढ़ाने की किसी विश्वविद्यालय में व्यवस्था नहीं 1.अंडर स्टैंडिंग इंडिया: इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा की पढ़ाई होती है। इसके अंतर्गत संगीत, वास्तु शास्त्र, परंपराएं, भोजन, आर्किटेक्ट, नृत्य, खेलकूद की विशेषज्ञता शामिल है। इतिहास, भूगोल, समाजशास्त्र का भारतीय दृष्टिकोण भी शामिल है। 2. ग्लोबल लीडरशिप: कई चीजें हैं, जो लोकल स्तर पर सिमट कर रह गई थी। इसे ग्लोबल स्तर पर पहचान दिलाई जाएगी। इसमें योग, आयुर्वेद, नचुरोपैथी, कलाकृतियां, पेंटिंग आदि शामिल हैं। 3. एनालिटिकल स्किल: किसी भी कार्य के बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए एनालिटिकल स्किल जरूरी है। डेटा, ग्राफ और चार्ट के द्वारा निरुपित करना सिखाया जाता है। क्वालिटी को ध्यान में रखकर इसे सिलेबस में शामिल किया गया है। 4. इंडियन नॉलेज सिस्टम: भारतीय ज्ञान की विभूतियों की पढ़ाई होती है। इसमें भारतीय दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है। इसमें वैदिक मैथैमैटिक्स, महान विभूतियों के विचार, भारतीय शिल्प का इतिहास के बारे में पढ़ाई होती है। 5. डिजिटल एजुकेशन: ग्लोबल प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए डिजिटल एजुकेशन जरूरी है। इसलिए इसे सिलेबस में शामिल किया गया। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट आधारित कंप्यूटर एजुकेशन आदि शामिल हैं। 6. ईवीएस: इसमें पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई होती है। यह विषय जीवन के लिए अहम है। इसमें पर्यावरण, प्रदूषण, बायो डायवर्सिटी समेत पर्यावरण से संबंधित कानून की जानकारी दी जाती है।


