कहीं बीयर और शराब की बोतलें, कहीं गुटखे का रैपर, तो कहीं जली हुई सिगरेट के फिल्टर। ताश के पत्ते और नमकीन के पैकेट। हर सुबह यह नजारा उन सरकारी स्कूलों का होता है, जहां बाउंड्री नहीं है। स्कूल पहुंचते ही सबसे पहले प्रभारी या शिक्षक खुद इन्हें हटाते हैं, तभी पढ़ाई शुरू हो पाती है। दरअसल, जिले में ऐसे एक नहीं, कई स्कूल हैं, जिनके परिसर शाम होते ही मयखाना बन जाते हैं। यही नहीं, कई स्कूल परिसर जुआरियों के भी अड्डा बन गए हैं। बुधवार को भी जब ये स्कूल खुले तो यही नजारा देखने को मिला। दैनिक निक भास्कर ने ऐसे स्कूलों का जायजा लिया। इनमें उत्क्रमित उच्च विद्यालय शहरी क्षेत्र बुधुडीह, मध्य विद्यालय पाडेडीह सहित अन्य स्कूल थे। यहां शिक्षकों ने नशेड़ियों की हरकत से अवगत कराया। जिले में करीब 300 से अधिक स्कूल ऐसे हैं, जहां बाउंड्री नहीं है। इन स्कूलों में ऐसी घटनाएं अधिक होती हैं। बता दें कि जिले में फिलहाल तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान का अभियान चलाया जा रहा है। स्कूल परिसर के 100 गज के दायरे में स्थित दुकानों में किसी भी तरह के तंबाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित की गई है। विक्रेताओं को ऐसे उत्पाद नहीं रखने की हिदायत दी जा रही है। दूसरी तरफ स्कूल परिसर में ही रात के वक्त जुआरियों और नशेड़ियों का जमावड़ा लग रहा है। उत्क्रमित उच्च विद्यालय शहरी क्षेत्र बुधुडीह में बाउंड्री नहीं है। परिसर में शिक्षकों को हर दिन शराब और बियर की बोतलें मिलती हैं। पिछले हफ्ते प्राइमरी सेक्शन का ताला टूटा मिला था। दो कुर्सियां भी गायब हैं। प्राचार्य नरेश कुमार राम ने बताया कि विद्यालय बंद होने पर यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा होने लगता है। विद्यालय परिसर में शौचालय के अंदर आपत्तिजनक चीज मिलती रहती हैं। अब हर दिन सुबह में नशे का सामान देखने को मिल रहा है। सबसे पहले ऐसे ही सामानों की सफाई करते हैं। विभाग को इस मामले को लेकर अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक किसी प्रकार का करवाई विभाग की ओर से नहीं की गई है। बुधवार को मध्य विद्यालय पाडेडीह में नास्ते के प्लेट, नमकीन के पैकेट, कोल्ड ड्रिंक्स और पानी की भी बोतलें मिलीं। प्रभारी प्रधानाध्यापक एके मिश्रा ने बताया कि हर दिन सिगरेट के टुकड़े, शराब की बोतल, खैनी, गुटखा के रैपर दिखते हैं। सबसे पहले इन्हें चुनकर साफ करते हैं। मामले की शिकायत जामताड़ा सदर थाने में की गई थी। इसके बाद रात में पेट्रोलिंग बढ़ी थी। पुलिस की सख्ती से ऐसी घटनाएं रुक गई थी। बाउंड्री नहीं है, इसलिए ऐसे लोग परिसर में आसानी से आ जाते हैं।


