राजकीय विधि महाविद्यालय के लॉ फाइनल ईयर के 38 विद्यार्थियों की मार्कशीट गायब होने का खुलासा बुधवार को हुआ। जब डाकिया खुद ही अंक तालिकाओं का पार्सल लेकर कॉलेज पहुंचा। डाकिया ने स्वीकार किया की गलती उसकी तरफ से हुई है उसने ही प्राइवेट व्यक्ति को डाक पहुंचने का जिम्मा दे रखा था। प्राइवेट व्यक्ति ने खुद ही लॉ कॉलेज की तरफ से फर्जी हस्ताक्षर किए और अपने घर डाक को रख लिया । 3 महीने तक डाक प्राइवेट व्यक्ति के घर पर पड़ी रही। भास्कर ने 7 जनवरी को जयपुर यूनिवर्सिटी से 3 महीने पहले स्पीड पोस्ट हुई 38 लॉ स्टूडेंट की मार्कशीट गायब होने के मामले को उठाया था। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा। हेड पोस्ट ऑफिस के पोस्टमास्टर ने इस पूरे मामले में 7 अक्टूबर 2024 को मार्कशीट कॉलेज डिलीवर करने की बात कही थी, जिसका रिसीविंग हस्ताक्षर भी दिखाया था, लेकिन छात्रों ने कॉलेज का घेराव करने के साथ डाक पहुंचाने वाले डाकिया को भी पकड़ा। विद्यार्थियों ने बताया कि जब पोस्ट ऑफिस के डाकिया के घर पहुंचे तब वह हमें प्राइवेट व्यक्ति के घर पर हमको लेकर गया। जहां पर बहुत सारी सरकारी डाक रखी हुई थी, वहीं एक कोने में हमारी मार्कशीट का बंडल भी पड़ा हुआ था, जिसके बाद डाकिया ने खुद डाक कॉलेज पहुंचाने का आश्वासन दिया। डाकियों को डाक हर घर तक न पहुंचानी पड़े। इसके लिए डाकिया कुछ पैसों का लालच देकर प्राइवेट व्यक्ति से पार्सल पहुंचने के लिए रख लेते हैं,जिससे उन्हें पार्सल पहुंचाने के लिए नहीं जाना पड़े। जिले में अधिकांश डाकिया इसी तरह पार्सल प्राइवेट व्यक्ति से पहुंचने का कार्य कर रहे हैं जिस वजह से क्यों को पार्सल मिलता है तो कईयों के पार्सल महीनों तक यूं ही पड़े रह जाते हैं


