भिंड में शनिवार को आयोजित नेशनल लोक अदालत के दौरान कुटुम्ब न्यायालय में पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चले आ रहे मनमुटाव और अलगाव को दूर करते हुए आपसी सहमति से फिर एक साथ रहने का संकल्प लिया गया। न्यायालय के समक्ष दंपतियों ने कसम खाई कि अब वे कोई ऐसा कदम नहीं उठाएंगे, जिससे उन्हें दोबारा अलग रहना पड़े। कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश दिलीप गुप्ता के प्रयासों से ऐसे 15 जोड़ों की बिखरी हुई गृहस्थी फिर से बसाई गई। इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश श्री गुप्ता ने सभी जोड़ों को एक-एक पौधा भेंट किया और समझाइश देते हुए कहा कि जीवन में आपस में मिल-जुलकर रहना है, अलग-अलग नहीं। उन्होंने कहा कि यह पौधा अपने घर के आसपास कहीं लगाएं और इसे पेड़ बनाएं। जब भी जीवन में विचारों में असहमति या विवाद हो, तो इसी पौधे के पास बैठकर आपसी सहमति बनाएं और समाधान निकालें। मछंड क्षेत्र की रहने वाली पुष्पा और श्याम सिंह का मामला सामने आया। दोनों की शादी को लगभग 15 वर्ष हो चुके हैं और वे पिछले पांच वर्षों से अलग-अलग रह रहे थे। उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। पुष्पा ने बताया कि उनके पति श्याम सिंह खाने-पीने के शौकीन थे और उनकी बात न मानकर अपनी भाभी की बात मानते थे, जिसका वे विरोध करती थीं। इसी बात पर उनके साथ मारपीट भी होती थी। इसके चलते वे पिछले चार वर्षों से अपने तीनों बच्चों के साथ मायके ग्राम पेवली में रह रही थीं। न्यायालय में इस समझौते में तीनों बच्चों की अहम भूमिका रही। बच्चों ने अपने पिता से शराब और अन्य गलत आदतें छोड़ने की बात कही और कहा कि सभी लोग एक साथ रहेंगे। बच्चों की बात सुनकर श्याम सिंह का दिल पिघल गया और उन्होंने कसम खाई कि अब ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगे, जिससे पत्नी और बच्चों से अलग रहना पड़े। इसके बाद न्यायालय में दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाई और फिर साथ रहने की कसम खाई। इसी तरह अटेर रोड का एक अन्य मामला सामने आया, जहां शादी के 45 साल बाद पति-पत्नी के बीच विवाद गहरा गया था। संतोष नगर निवासी बुजुर्ग महिला रामढली ने बताया कि उनके पांच बच्चे हैं, सभी की शादी हो चुकी है और उनके भी बच्चे हैं, जो शादी की उम्र के हो चुके हैं। उनके पति राजाराम घर खर्च के लिए पैसे नहीं देते थे और मांगने पर मारपीट करते थे। इसी कारण वे पिछले सात महीनों से मायके में रह रही थीं। न्यायालय में समझाइश के बाद राजाराम ने अपनी पत्नी के साथ मारपीट न करने की कसम खाई। इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाई और न्यायाधीश ने उन्हें पौधा भेंट किया। इसी क्रम में गोहद क्षेत्र के चंदहारा गांव निवासी शकील खान और उनकी पत्नी आजीवन का मामला भी सुलझाया गया। दोनों का निकाह चार वर्ष पूर्व हुआ था और उनका तीन वर्ष का एक बच्चा भी है। छोटी-छोटी बातों पर विवाद के चलते दोनों पिछले तीन वर्षों से अलग-अलग रह रहे थे। दोनों की ओर से न्यायालय में प्रकरण दर्ज कराया गया था। कुटुम्ब न्यायालय में काउंसलिंग के बाद दोनों ने फिर से एक साथ रहने का निर्णय लिया, एक-दूसरे को माला पहनाई और न्यायाधीश द्वारा पौधा भेंट किया गया। इस तरह कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश दिलीप गुप्ता के व्यक्तिगत प्रयासों और प्रभावी मार्गदर्शन से 15 पति-पत्नी जोड़ों ने अपने सभी मतभेद समाप्त कर फिर से साथ रहने का फैसला किया। बताया गया कि इस नेशनल लोक अदालत ने न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम करने और पक्षकारों को त्वरित न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दांपत्य जीवन से जुड़े 16 सफल सुलह प्रकरणों के अलावा, विभिन्न श्रेणियों के कुल 57 पारिवारिक प्रकरणों का भी सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। इस अवसर पर रीडर राजीव यादव, न्यायालयीन स्टाफ और परिजन उपस्थित रहे।


