एक ओर प्रदेश में निवेश लाने के लिए जहां राज्य सरकार जगह-जगह इन्वेस्टर्स समिट कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर मप्र माइनिंग कार्पोरेशन ने प्रदेश में निवेश करने वाली 12 कंपनियों के करीब 150 करोड़ रुपए रोक रखे हैं। यह वह राशि है, जो कंपनियों ने ठेका लेने के दौरान बतौर ई सिक्योरिटी जमा की थी। जिन कंपनियों ने यह राशि मांगी है, उनके ठेके का अनुबंध 30 जून 2023 को समाप्त हो गया है। माइनिंग कार्पोरेशन ने इन निवेशकों को राशि वापिस देने की बजाय अतिरिक्त राशि की मांग की थी। निवेशकों ने इस डिमांड नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखाटाया। दिया गया है। जिसे हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया। इस मामले में सॉलिसिटर जनरल से भी कानूनी राय ली गई तो उन्होंने मप्र स्टेट माइनिंग कार्पोरेशन लिमिटेड की मांग को अवैध करार दिया। उन्होंने अपनी ओपिनियन में कहा कि अनुबंध करते समय जब बोली स्वीकार की जाती
है और राशि में रॉयल्टी शामिल है। ऐसे में अनुबंध से अधिक रॉयल्टी की मांग करना कानूनी रूप से गलत है। माइनिंग कार्पोरेशन ने रेत खदान के लिए निवेशकों द्वारा उच्चतम बोली लगाने के बाद भी अतिरिक्त राशि मांगी की थी। इसके बाद हंगामा शुरू हुआ। अब जानकारी मिली है कि विभाग ई सिक्योरिटी वापिस देने की बजाय सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। इधर सभी निवेशक अभी भी सिक्योरिटी डिपोजिट वापसी का इंतजार कर रहे हैं। 242 रेत खदानों की होगी नीलामी
माइनिंग कार्पोरेशन एक बार फिर 7 जिलों में स्थित 242 रेत खदानों की नीलामी करने जा रहा है। नीलामी के लिए कंपनियों से ऑनलाइन आवेदन बुलाए गए हैं। बिड जमा करने का समय 11 जनवरी से 4 फरवरी तक है। सबसे अधिक रेत खदानें भिंड में हैं। यहां कुल 72 रेत खदान हैं। बालाघाट में 65, उज्जैन में 32, अलीराजपुर में 29, शाजापुर में 20 और टीकमगढ़ में 18 खदानें हैं।


