संगम सिटी प्रयागराज। इसकी पहचान महाकुंभ, जवाहरलाल नेहरु और अमिताभ बच्चन से है। मगर, जब बात स्वाद की होती है, तो याद आता है- देहाती रसगुल्ला। आप सोचेंगे कि क्या कोई रसगुल्ला देहाती भी हो सकता है, जी हां… बिल्कुल। प्रयागराज के लजीज रसगुल्ले की यही पहचान है। 40 साल पुराने इस लाजवाब स्वाद को चखने के लिए प्रयागराज में देश-विदेश से लोग आते हैं। रसगुल्ला भी ऐसा नरम कि मुंह में रखते ही घुल जाता है। महाकुंभ में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो चुका है। ऐसे में देहाती रसगुल्ले की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। दैनिक भास्कर की स्पेशल सीरीज जायका में आज जानते हैं देहाती रसगुल्ला के 40 साल के सफर के बारे में… देहाती रसगुल्ले की शुरुआत प्रयागराज के बेरहना से हुई। करीब 40 साल पहले यहां राम स्वरूप यादव ने दुकान शुरू की। डिश बेचते थे- रसगुल्ला। उनकी दुकान का कोई नाम नहीं था। राम स्वरूप यादव के हाथों से बना रसगुल्ला काफी सॉफ्ट और कम मीठा होता था। जो खाता तारीफ करता। धीरे-धीरे उनका रसगुल्ला पूरे प्रयागराज में फेमस हो गया। राम स्वरूप के निक नेम पर फेमस हुआ रसगुल्ला
लोग खड़े होकर रसगुल्ला खाते और घर भी ले जाते। दुकान तो चल निकली, लेकिन न तो दुकान का कोई नाम था। न ही रसगुल्ले का। अब नाम क्या रखा जाए, इस पर मामला फंस गया। राम स्वरूप यादव के बेटे अजय यादव बताते हैं- मेरे पापा को उनके दोस्त प्यार से ‘देहाती’ बुलाते थे। पापा के नाम से देहाती शब्द ऐसा जुड़ा कि ‘देहाती’ ही उनकी पहचान बन गया। इसके बाद पापा ने दोस्तों के कहने पर दुकान का नाम ‘देहाती रसगुल्ला’ रख दिया। अब देहाती रसगुल्ला अपने आप में एक ब्रांड बन गया है। कोई भी प्रयागराज आता है तो बिना देहाती रसगुल्ले का जायका लिए वापस नहीं जाता है। देहाती रसगुल्ले के संस्थापक राम सेवक यादव अब इस दुनिया में नहीं हैं। इस दुकान को उनके 3 बेटे विजय, अजय और अमित मिलकर संभालते हैं। दुकान की लोकेशन- कुंभ क्षेत्र से करीब दो किमी दूर स्थित मधवापुर सब्जी मंडी है। 1 रुपए से शुरुआत, अब कीमत 30 रुपए देहाती रसगुल्ला की आज से 40 साल पहले जब शुरुआत हुई तो इसकी कीमत 1 रुपए थी। उस समय भी यह आम रसगुल्लों की तुलना में डबल साइज का था। उस समय छोटा रसगुल्ला 50 पैसे प्रति पीस बिकता था। धीरे-धीरे खोवा और चीनी, महंगी होती गई, तो देहाती रसगुल्ला 1 रुपए से बढ़कर धीरे-धीरे 30 रुपए की कीमत तक पहुंच गया। यहां हर रोज करीब 15 हजार रसगुल्ला बिकते है। सालाना टर्नओवर करीब 80 -85 लाख का है। विदेशी टूरिस्ट भी हैं इस स्वाद के दीवाने प्रयागराज में ब्रिटेन, अमेरिका, थाइलैंड, कनाडा, पोलैंड, सिंगापुर, बाली, बुल्गारिया समेत पूरे विश्व से लोग आते हैं। गंगा नहाते हैं, फिर यहां करीब 6 किमी. दूर बेरहना तक भी पहुंचते हैं। माघ और कुंभ मेले में आने वाले विदेशी टूरिस्ट भी देहाती रसगुल्ले का स्वाद चखे बिना नहीं रह पाते। गुजरात, मध्य प्रदेश और बिहार से कारीगर रेसिपी समझने आए छोटे राम आसरे यादव बताते हैं- हमारी दुकान पर रसगुल्ले की रेसिपी जानने गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार तक से दुकानदार आते हैं। कई हमारी रेसिपी लिखकर ले गए, लेकिन हमारी तरह रसगुल्ला नहीं बना पाए। यही हमारी यूएसपी है। महाकुंभ में पहुंचते हैं विदेशी मेहमान राम आसरे यादव बताते हैं- महाकुंभ में यहां दोगुनी भीड़ होने वाली है। धीरे-धीरे लोग बढ़ रहे हैं। हमारा काम लोगों की सेवा करना है। महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को सेवा भाव से रसगुल्ला परोसेंगे। हमारे यहां विदेशी सैलानी जरूर आते हैं। रसगुल्ला पैक कराकर ले जाते हैं। क्या है सॉफ्टनेस और स्वाद का राज? राम आसरे यादव ने बताया, रसगुल्ले में अमूमन 3 चीजों की जरूरत पड़ती है। पहला खोवा, दूसरा चीनी का शीरा और तीसरा मैदा। हम मटेरियल से कंप्रोमाइज नहीं करते हैं। खुद मंडी जाकर खोवा खरीदते हैं। कुछ चुनिंदा कारीगर है, जो शुद्ध खोवा बनाते हैं। हमारे खोवा के कारीगर सेट हैं। हम उन्हीं से खरीदते हैं। खोवा चेक करते हैं, उसके बाद तैयार करते हैं। उन्होंने बताया- अमूमन लोग एक किलो खोवा में 400 से 500 ग्राम मैदा मिलाते हैं। इससे उनका मुनाफा बढ़ जाता है। लेकिन, हम ऐसा नहीं करते हैं। क्योंकि मैदा मिलाने से रसगुल्ला सख्त हो जाता है। स्वाद पर भी असर पड़ता है। हमारे यहां 1 किलो खोवा में सिर्फ 100 ग्राम मैदा ही मिलाते हैं। इससे रसगुल्ला नरम रहता है। मुंह में रखते ही घुल जाता है। अब पढ़िए रसगुल्ला खाकर क्या कहते हैं लोग… ……………………………………….. दुनिया में केवल बनारस में मिलती है पलंग तोड़ मिठाई: गोबर के उपले पर रोजाना सिर्फ 8 किलो बनती है, खाने के लिए वेटिंग बनारस पूरी दुनिया में अपने जायके के लिए फेमस है। ऐसा ही अनोखा स्वाद पलंग तोड़ मिठाई का है। यह मिठाई सिर्फ ठंड के मौसम में मिलती है। इस मौसम में अगर आप बनारस घूमने आ रहे हैं, तो इस मिठाई का स्वाद जरूर चखें। पढ़ें पूरी खबर…


