मध्यप्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के तहत चल रहे वोटर लिस्ट सत्यापन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। 4 नवंबर से शुरू हुए इस अभियान को करीब 40 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद वोटर लिस्ट की खामियां कम नहीं हुई हैं। प्रदेश के 55 जिलों में ज्यादातर जगह गणना पत्रक भरने का काम 100% पूरा हो चुका है, फिर भी लाखों मतदाताओं के रिकॉर्ड में उम्र, माता-पिता, संतान और जेंडर से जुड़ी गंभीर विसंगतियां मिली हैं। इन्हीं कारणों से भारत निर्वाचन आयोग को बार-बार गणना पत्रक जमा करने की तारीख बढ़ानी पड़ी। पहले यह तारीख 4 दिसंबर थी, जिसे बढ़ाकर पहले 11 दिसंबर और अब 18 दिसंबर कर दिया गया है। अब 23 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होगी। पूरे प्रदेश में करीब 2 करोड़ 24 लाख वोटर्स के डाटा में खामियां पाई गई हैं। इनमें से 20 लाख 42 हजार 579 वोटर्स के रिकॉर्ड में 6 से ज्यादा संतान दर्ज हैं। वहीं एक करोड़ से अधिक वोटर्स के पिता के नाम मेल नहीं खा रहे। नोटिस के समय दिखाने होंगे दस्तावेज… 2003 का लिंक बताना होगा, नहीं तो तय दस्तावेज पेश करने होंगे। तभी नाम एसआईआर में जोड़ा जाएगा, वरना नाम काट दिया जाएगा। नए नाम जोड़ने के लिए भी 2003 का लिंक देना जरूरी होगा। नोटिस का जवाब देते समय आधार कार्ड, राशन कार्ड समेत 13 तरह के दस्तावेज दिखाने होंगे। 18 दिसंबर तक डेटा नहीं सुधरा तो सभी को नोटिस


