फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने दिसंबर के पहले 12 दिनों में भारतीय शेयर बाजार से ₹17,955 करोड़ (2 बिलियन डॉलर) की बिकवाली की है। NSDL डेटा के मुताबिक, 2025 में कुल निकासी ₹1.60 लाख करोड़ ($18.4 बिलियन) पहुंच गई। नवंबर में ₹3,765 करोड़ की बिकवाली हुई थी। अक्टूबर में ₹14,610 करोड़ की खरीदारी के बाद फिर निकासी शुरू हो गई। इस तरह विदेशी निवेशक इस साल में अब तक 1.60 लाख करोड़ रुपए शेयर बाजार से निकाल चुके हैं। रुपए की कमजोरी से पैसा निकाल रहे विदेशी निवेशक मॉर्निंगस्टार के हिमांशु श्रीवास्तव बोले अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची हैं, पैसा कम घूम रहा है और वहां सेफ-ज्यादा रिटर्न वाली चीजें ज्यादा पसंद की जा रही हैं। इस वजह से इन्वेस्टर्स का मूड खराब है। साथ ही, भारत के शेयर महंगे लग रहे हैं, दूसरे उभरते बाजारों (इमर्जिंग मार्केट्स) की तुलना में यहां वैल्यू कम दिख रही है। एंजेल वन के वकार जावेद खान ने बताया –रुपया कमजोर हो रहा है, दुनिया भर में इन्वेस्टर्स अपना पोर्टफोलियो फिर से बैलेंस कर रहे हैं, साल खत्म होने का असर है और इकोनॉमी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ये सब मिलकर FPIs को पैसे निकालने पर मजबूर कर रहे हैं। इस साल 5% तक गिरा रुपया रुपया 11 दिसंबर को डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 90.47 पर आ गया था। इससे पहले रुपए ने 4 दिसंबर को 90.43 के स्तर पर ऑल टाइम लो बनाया था। 1 जनवरी को रुपया डॉलर के मुकाबले 85.70 के स्तर पर था, जो अब 90.47 के लेवल पर पहुंच गया है। इस साल 1.60 लाख करोड़ रुपए की बिकवाली अक्टूबर में FPIs ने भारतीय इक्विटी में 14,610 करोड़ रुपए का निवेश किया था, जो जुलाई से सितंबर तक चले तीन महीनों की बिकवाली की लाइन को तोड़ने वाला था। उस दौरान जुलाई में 17,700 करोड़, अगस्त में 34,990 करोड़ और सितंबर में 23,885 करोड़ रुपए निकाले गए थे। इस साल अब तक कुल मिलाकर विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से 1.60 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी की है। DIIs की खरीदारी से संभला बाजार FPIs की निकासी के बावजूद बाजार पर असर कम पड़ा क्योंकि DIIs ने दिसंबर में ₹39,965 करोड़ की खरीदारी की। जियोजिट इन्वेस्टमेंट्स के VK विजयकुमार ने कहा कि इंडिया की स्ट्रॉन्ग ग्रोथ और अर्निंग्स आउटलुक को देखते हुए सस्टेन्ड सेलिंग अनसस्टेनेबल है। FPI सेलिंग आगे कम हो सकती है। दिसंबर में फेड और ट्रेड डील पर टिकी उम्मीदें आगे की राह पर नजर डालें तो दिसंबर में FPI एक्टिविटी ज्यादातर अमेरिकी फेड रिजर्व के रेट कट सिग्नल्स और भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट की प्रोग्रेस पर निर्भर करेगी। अगर ये पॉजिटिव रहे तो बाजार में वापसी हो सकती है, नहीं तो बिकवाली का सिलसिला जारी रह सकता है।


