विदिशा में पार्षदों का जल सत्याग्रह:33 दिन बाद भी विकास कार्य शुरू नहीं हुए, विधायक पर वादाखिलाफी का आरोप

विदिशा नगर पालिका में विकास कार्य ठप होने और भ्रष्ट अधिकारियों को हटाने की मांग को लेकर भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों ने बेतवा नदी में जल सत्याग्रह किया। यह विरोध पिछले 33 दिनों से नीमताल चौराहे पर जारी धरने का विस्तार है। पार्षदों ने नगर विधायक पर वादाखिलाफी और शहर के हालात पर उदासीन रहने का गंभीर आरोप लगाया। पार्षदों ने अधिकारियों को हटाने की मांग की
पार्षद प्रतिनिधि धर्मेंद्र सक्सेना ने बताया कि लगभग एक सप्ताह पहले विधायक मुकेश टंडन ने धरना स्थल पर आकर भ्रष्ट अधिकारियों को हटाने और 13 तारीख से विकास कार्य शुरू करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, अब तक न तो किसी अधिकारी का तबादला हुआ है और न ही कोई निर्माण कार्य शुरू किया गया। इसी वजह से पार्षदों को यह कदम उठाना पड़ा। सक्सेना ने विदिशा के बीजेपी नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मंच से विकास की बातें करने वाले नेता अब शहर की बदहाल स्थिति में आंदोलन कर रहे पार्षदों का साथ नहीं दे रहे। बेतवा में मिल रहा है नाले का पानी
कांग्रेस पार्षद आशीष माहेश्वरी ने कहा कि बेतवा नदी की हालत प्रशासन और विधायक की विफलता को उजागर करती है। वहीं जमुना कुशवाहा ने आरोप लगाया कि चोर घाट नाले का गंदा पानी आज भी नदी में मिल रहा है और शहर का पूरा सीवेज बिना शुद्ध किए लोगों को दिया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है। दिलचस्प बात यह रही कि इस आंदोलन में बीजेपी और कांग्रेस के पार्षद एकजुट नजर आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई राजनीति की नहीं, बल्कि विदिशा के हक और विकास की है। पार्षदों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, धरना और आंदोलन जारी रहेगा।

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