जोधपुर में साइबर ठगी के मामले इन दिनों अचानक से बढ़ चुके हैं। इसमें पढ़े-लिखे लोगों को भी साइबर ठग बातों में उलझाकर ठगी का शिकार बना रहे हैं। पुलिस कमिश्नरेट में गुरुवार को ऐसे ही कई मामले सामने आए जिनमें लोगों को झांसे लेकर लाखों रुपए की ठगी कर ली गई। फिलहाल पीड़ित की ओर से थाने में रिपोर्ट दी गई है इसके आधार पर पुलिस मामला दर्ज कर अब साइबर ठगी के रुपए रिफंड करवाने के प्रयासों में जुटी हुई है। ठगी करने वाले ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताया और 76 वर्ष से बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर खाते से 4 लाख रुपए से अधिक की राशि अपने खाते में ट्रांसफर करवा ली गई। इसका पता चलने पर बुजुर्ग के होश उड़ गए। बाद में वह थाने पहुंचे और मामला दर्ज करवाया। पुलिस कमिश्नरेट के महामंदिर थाना क्षेत्र में भी सेवानिवृत्त सीनियर सिटीजन चैन सिंह राठौड़ के साथ ठगी कर ली गई। इसको लेकर उन्होंने मामला दर्ज करवाया है। इसमें बताया कि अज्ञात ठगने उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगी करते हुए चार लाख रुपए से अधिक की राशि ठग ली गई। ठगों ने 76 वर्षीय बुजुर्ग को सबसे पहले 5 जनवरी को मोबाइल पर एक वीडियो कॉल किया था। वीडियो कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस का अधिकारी बताया और कहा कि उसके खिलाफ एक मनी लॉन्ड्रिंग का केस है। जिसमें वह जांच अधिकारी है। इस मामले की जांच के लिए आवश्यक है कि वह उनके सेविंग अकाउंट एसबीआई राईकाबाग ब्रांच का पूरा पैसा उनके बताए हुए बैंक खाते में जमा करवा दे। उसकी बातों में आकर डर के मारे बुजुर्ग ने अपना पूरा बैंक बैलेंस उसके बताएं बैंक खाते में एसबीआई बैंक की राईकाबाग ब्रांच से आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर करवा दिया। बाद में खुद को आईपीएस बताने वाले राजेश प्रधान नाम के व्यक्ति ने बताया कि उसे उनके पैसे मिल गए हैं और उनके अकाउंट की जांच में मनी लॉन्ड्रिंग का कोई इंवॉल्वमेंट नहीं पाया गया है। अतः नियम अनुसार 1 घंटे में वह पैसे लौटा देगा। यह पूरी बात 6 जनवरी को हुई थी लेकिन अगले दिन 7 जनवरी तक पैसे नहीं लौटाए गए। इस पर बुजुर्ग को शक हुआ तो उन्होंने थाने पहुंचकर रिपोर्ट दी। थाने पहुंचे तो पता चला कि उनके साथ साइबर ठगी हो गई है।


