जंगलों में बांस दे रहा रोजगार:वन विभाग को 3.50 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है

राजस्थान के उदयपुर जिले में कोटड़ा-देवला के जंगलों में नदी किनारे 6 माह वाला गांव बसा है। 50 से ज्यादा कथौड़ी परिवार अक्टूबर से मार्च तक यहां बांस कटाई करते हैं। करीब 40 साल से यहां 6 माह के लिए गांव बसते हैं। इससे वन विभाग को करीब 3.50 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है। उदयपुर में डेंड्रोकैलेमस स्ट्रिक्टस प्रजाति के बांस होते हैं, जिनकी खासियत उनकी लंबाई है, जो 35-40 फीट तक होती है। विभाग ने बांस के जंगलों को 4 भागों में बांटा है। इसलिए जिस हिस्से की कटाई हो रही है, वह 4 साल बाद कटेगा। इतिहास… अंग्रेज महाराष्ट्र से 200 साल पहले लाए थे वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कथौड़ी समुदाय बांस कटाई में माहिर है। अंग्रेज 200 साल पहले महाराष्ट्र से इन्हें लाए थे। इस जनजाति के लोग आंगेणा, फुलवारी नाल एरिया के कुछ गांवों में बसे हैं। इंतजाम… सोलर पैनल से बना रहे हैं बिजली देवला कस्बे से 40 किमी दूर घने जंगल में बसे इस गांव में सोलर पैनल से बिजली का इंतजाम किया गया है। यहां मोबाइल का नेटवर्क तक नहीं आता है। नेटवर्क के लिए जंगल से मुख्य सड़क पर आते हैं। 40 साल से बांस कटाई 40 साल से हर साल अक्टूबर से मार्च तक बांस की कटाई होती है। हर माह के 10 और 25 तारीख को सिरोही में नीलामी होती है।

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