सेवा और परोपकार के लिए मिला है यह जीवन : नागार्च

धनबाद | स्टीलगेट दुर्गा व शिव मंदिर प्रांगण में श्रीमद् भागवत कथा रसोत्सव के दूसरे दिन भक्ति की अविरल धारा बही। वृंदावन से पधारे हित ललित वल्लभ नागार्च ने श्रीमद् भागवत कथा की महिमा का वर्णन किया। बताया कि श्रीमद् भागवत का श्रवण करने से मनुष्य का उद्धार होता है। यह धार्मिक ग्रंथ साक्षात भगवान का प्रतीक है। इनका दर्शन और श्रवण जीवन से पावन हो जाता है। मनुष्य को यह शरीर केवल भोग के लिए नहीं, बल्कि सेवा व परोपकार के लिए मिला है। सेवा ही ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है। कथा के दौरान बीच-बीच में भजनों का श्रद्धालुओं ने खूब आनंद उठाया। मन जइयो मत भूल राधा रानी के चरण, सुख रानी राधा रानी के चरण, राधा प्यारी के चरण, श्यामा प्यारी के चरण… भजन से कथा स्थल भक्तिमय हो उठा। नाचते-झूमते हुए लोगों ने भजन का आनंद उठाया। जय श्रीकृष्ण की जयकार से कथा स्थल गूंज उठा।

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