सीएमएचओ की कार्यशैली पर सवाल, शासन के आदेश उड़ाई धज्जियां नियम विरुद्ध सौप दिया संविदा डॉ को बीएमओ कोतमा का प्रभार

सीएमएचओ की कार्यशैली पर सवाल, शासन के आदेश उड़ाई धज्जियां
नियम विरुद्ध सौप दिया संविदा डॉ को बीएमओ कोतमा का प्रभार
अनूपपुर।
जिंदगी भर अनूपपुर जिले के स्वास्थ्य विभाग में काम कम नेतागिरी ज्यादा कर नौकरी चलाने वाले वर्तमान सीएमएचओ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अनूपपुर की कमान संभालते ही मध्यप्रदेश शासन के संचालनालय स्वास्थ्य के जारी आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए नियम विरुद्ध तरीका से आदेश जारी कर जिले के कोतमा विकासखंड के निगवानी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ संविदा चिकित्सक को प्रशासनिक दायित्व सौंप खण्ड चिकित्सा अधिकारी की कमान दे दिया। हालांकि सीएमएचओ की कार्यशैली को लेकर जिले भर के आमजन मानस में किसी से छिपा नही वे सदैव सरकारी कर्मचारी कम बल्कि नेता ज्यादा रहा करते थे, लोगों की माने तो वर्तमान समय पर अनूपपुर जिले की कमान सम्हाल रहे सीएमएचओ जिले के अनूपपुर, कोतमा सहित अन्य जगह कई बार बीएमओ के प्रभार में रहकर काम किया है, इन्होंने प्रशासनिक दायित्व बतौर डीएचओ, मलेरिया अधिकारी के रूप में रहकर शासन को नुकसान पहुंचाने का काम किया है। जनचर्चा है की अनूपपुर जिले में प्रशासनिक पद पर रहकर साहब जंहा भी कम किये है अगर उनके कार्यकाल के पुराने रिकॉर्ड की जांच कराई जाए तो बड़े बड़े राज खुलकर सामने आ सकते है। सीएमएचओ के लिए नियम कानून को दरकिनार कर काम करना कोई नई बात नही रही ये विभिन्न प्रशासनिक पदों में रहकर अपने निजी वाहन का उपयोग कर फर्जी  बिल भंजाने में कभी कोताही नही की है, जबकि नियमानुसार सरकारी कार्य हेतु निजी वाहन का उपयोग कर फर्जी बिल लगाना न्याय उचित नही है। अगर ऐसा होता तो कलेक्टर एसपी सहित जिले के विभिन्न विभागों में दायित्व सम्हाल रहे अधिकारी  बहुत ही कम होंगे जिनके स्वयं के निजी वाहन न हो लेकिन शासन के नियमानुसार ही बनाये गए नियम कानून का पालन कर सरकारी कार्य हेतु शासन के प्रक्रिया के मुताबिक ही वाहन का उपयोग करते देखा जा रहा लेकिन सीएमएचओ के सफर का वाहन कुछ और होता है और बिल किसी अन्य वाहन के नाम पर भंजाने का काम निरंतर किया गया है। जिले का स्वास्थ्य विभाग कोई पहली बार नही सदैव नित नए मामलों को लेकर सुर्खियों में देखा गया है यंहा पदस्थ सीएमएचओ अपनी मन मर्जी चलाकर कलेक्टर जैसे पद में बैठे जिम्मेदार पद में कोताही नही की गई है यंहा तो मलेरिया विभाग में भर्ती घोटाला कांड को अंजाम देकर चंद्रमोहन ठाकुर जैसे अच्छे अधिकारी को बदनाम किया जा चुका है। इसलिए जिले के स्वास्थ्य विभाग की तमाम स्थिति यों को मद्देनजर रखते हुए कलेक्टर हर्षल पंचोली को भी बहुत फूंक कर कदम रखना आवश्यक होगा इस विभाग में बैठे लोग नियम कानून को शक्कर में पानी मिलाकर शर्बत की तरह घोलकर पी जाते है। जो वर्तमान सीएमएचओ डॉ आर के वर्मा ने पद की गरिमा में चूर होकर संचालनालय के आदेश को दरकिनार कर नियम विरुद्ध अपात्र डॉ को पात्र बनाकर खंड चिकित्सा अधिकारी की कमान सौंप दिया।
संचालनालय का आदेश क्या है
मध्यप्रदेश शासन संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें, के द्वारा जारी आदेश के मुताबिक प्रदेश के सभी जिलों के जिम्मेदार अधिकारियों ऊ निर्देशित कर आदेश जारी किया गया था कि किसी भी संविदा कर्मचारी को प्रशासनिक पद पर नही बैठाया जाएगा उक्त जारी आदेश क्र./01 जी/विज्ञप्त/सेल -05/2022/7/1 भोपाल, दिनांक 25/03/2022 को समस्त, क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवायें म.प्र. समस्त, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी म.प्र.समस्त, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक म.प्र. को विषयान्तर्गत संविदा चिकित्सकों को प्रशासकीय पदों का प्रभार नहीं सौंपे जाने के संबंध में तथा मुख्य खण्ड चिकित्सा अधिकारी का प्रभार सौंपे जाने के संबंध में। विदित हो कि वर्ष 2016 से पदोन्नति पर प्रतिबंध होने के कारण चिकित्सा संवर्ग के पदोन्नति से पूर्ति किये जाने वाले विभिन्न पद जिला स्वास्थ्य अधिकारी, जिला परिवार कल्याण अधिकारी, जिला टीकाकरण अधिकारी, मुख्य खण्ड चिकित्सा अधिकारी, जिला कुष्ठ अधिकारी अन्य प्रशासकीय/वित्तीय पदों पर जिला स्तर/राज्य स्तर से नियमित/पात्र चिकित्सक को प्रभार सौंपकर कार्य सम्पादित करया जाता है। किन्तुं कुछ जिलों में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों/सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षकों द्वारा इन पदों का प्रभार संविदा चिकित्सक को सौंपा जा रहा है जिससे विवाद एवं शिकायत की स्थिति उत्पन्न हो रही है। प्रशासकीय/वित्तीय पदों पर संविदा चिकित्सकों को प्रभार नहीं सौंपा जावे।
शासन के निर्देशों का नही हो रहा पालन
जारी आदेश में संचालनालय द्वारा निर्देशित किया गया था कि संचालनालय स्तर से पदस्थापना/प्रभार सौंपे जाने तक, जिला स्तर पर आवश्यकता होने पर मुख्य खण्ड चिकित्सा अधिकारी का प्रभार सौंपे जाने हेतु निम्नलिखित बिन्दुओं अनुसार, प्रभार सौंपा, जावे संबंधित विकासखण्ड के सामुदायिक/प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र अंतर्गत पदस्थ वरिष्ठ नियमित चिकित्सा अधिकारी को सौंपा जावे जिनका वेतन 6600 ग्रेड-पे था उच्च हो. इस वेतनमान को प्राप्त करने वाले चिकित्सक उक्त विकासखण्ड में पदस्थ नहीं होने पर संस्था अंतर्गत पदस्थ अन्य वरिष्ठ चिकित्सक को प्रभार सौंपा जावे। वरिष्ठ चिकित्सक प्रभार लेने हेतु सहमत नहीं हो  अथवा संबंधित के विरूद्ध शिकायत जांच प्रचलित हो तो अगले कम परः पदस्थ कनिष्ठ चिकित्सा अधिकारी को प्रभार सौंपा जावे।

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