काउंसिल की लापरवाही का असर:पैरामेडिकल कोर्स – मप्र के 150 कॉलेजों में दो सत्रों के प्रवेश एक ही साल में

मप्र पैरामेडिकल काउंसिल की लेटलतीफी ने राज्य के करीब 150 कॉलेजों के हजारों छात्रों को संकट में डाल दिया है। दो सत्रों में करीब 25 हजार छात्र पहले से ही एक साथ फर्स्ट ईयर कर रहे हैं। अब काउंसिल तीसरे सत्र 2025-26 में एडमिशन की तैयारी कर रही है। सवाल है कि इतने छात्रों को कहां बैठाया जाएगा। रजिस्ट्रार डॉ. शेलोज जोशी बताते हैं कि पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए कॉलेज दो पालियों में कक्षाएं चला सकते हैं। 2025–26 का एडमिशन सरकार तय करेगी। काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि सत्र को शून्य घोषित नहीं किया जाएगा। पैरामेडिकल कोर्स में सत्र 2023-24 व सत्र 2024-25 में एक ही साल में फर्स्ट ईयर में प्रवेश दिए गए हैं। वर्ष 2025 में ही सत्र 2025-26 के छात्रों को 6 माह देरी से प्रवेश देने की बात कही जा रही है। एक साल में 3 सत्रों के छात्रों को फर्स्ट ईयर में प्रवेश देने से हमारे सामने क्लास, लैब व हॉस्टल का संकट खड़ा हो जाएगा। -प्रो. नवनीत गरुड़, कोऑर्डिनेटर, पैरामेडिकल कोर्स, जेयू 1 नवंबर से कक्षाएं शुरू होनी थी, मान्यता अब तक नहीं…
उच्च शिक्षा विभाग और पैरामेडिकल काउंसिल के अधिकारियों के साथ 23 मई 2025 को बैठक हुई थी। काउंसिल ने दावा किया कि सत्र 2025-26 की मान्यता 30 जुलाई तक जारी कर दी जाएगी, उच्च शिक्षा विभाग 31 अगस्त तक एनओसी देगा और संबंधित विश्वविद्यालय 1 सितंबर से 15 अक्टूबर के बीच संबद्धता प्रदान करेगा। काउंसलिंग 1 अगस्त से 15 अक्टूबर तक होगी और कक्षाएं 1 नवंबर से शुरू होंगी। लेकिन ये दावे झूठे साबित हुए। अब तक न मान्यता जारी हुई, न संबद्धता मिली और न प्रवेश शुरू हुआ। काउंसिल के अधिकारियों का कहना है कि 8–10 दिन में सत्र 2025–26 में प्रवेश को लेकर निर्णय होगा और उसके बाद मान्यता जारी होगी। काउंसिल रजिस्ट्रार बोले- दो पॉलियों में पढ़ाएं, सत्र काे शून्य घोषित नहीं किया जाएगा

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