सतना में सरकारी फाइलों में जर्जर और भंडारण के लिए अयोग्य घोषित किए गए गोदामों में अधिकारियों ने 73,610 बोरी चावल भंडारित करा दिया है। यह मामला वेयरहाउसिंग लॉजिस्टिक कॉरपोरेशन डिलौरा यूनिट-1 के अंतर्गत आने वाले पतेरी गोदाम क्रमांक 32 और 34 से संबंधित है। इस भंडारण के कारण लगभग 14.72 करोड़ रुपए मूल्य के चावल की गुणवत्ता पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने 19 दिसंबर 2024 को जिला प्रबंधक, नागरिक आपूर्ति निगम को एक पत्र भेजा था। इस पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि पतेरी गोदाम क्रमांक 32, 33, 34 और 35 जर्जर अवस्था में हैं, इसलिए इनमें किसी भी प्रकार का खाद्यान्न भंडारित न किया जाए। हालांकि, इस चेतावनी के लगभग एक वर्ष बाद भी उन्हीं गोदामों को चावल से भर दिया गया। छत जर्जर, फर्श टूटे हुए हैं
पतेरी के गोदाम क्रमांक 32 और 34 में कुल 36,805 क्विंटल चावल का भंडारण किया गया है। सरकारी दर 4,000 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से इसकी अनुमानित कीमत लगभग 14.72 करोड़ रुपए है। इन गोदामों की छत जर्जर है, फर्श टूटे हुए हैं और नमी की समस्या भी है, जिससे चावल के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। पूर्व में भी इन गोदामों में रखा चावल खराब हो चुका है। इससे पहले 10 सितंबर 2024 को नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक पंकज बोरसे ने पतेरी गोदाम में 500 बोरी खराब चावल पकड़ा था। जांच में यह सामने आया था कि खराब चावल को अच्छे चावल में मिलाकर दोबारा भरने का प्रयास किया जा रहा था। इस घटना के बाद गोदाम के सभी भुगतान रोक दिए गए थे। इसी के परिणामस्वरूप तत्कालीन डिलौरा के वेयरहाउस प्रबंधक ने गोदाम को भंडारण योग्य न मानते हुए डीएम नान से भंडारण न करने की सिफारिश की थी। जानकारों के अनुसार, सरकारी गोदामों के अलावा जिले में निजी गोदाम भी उपलब्ध हैं। हालांकि, पिछले 2-3 साल से उनका भुगतान नहीं होने के कारण अधिकांश निजी गोदामों में भंडारण नहीं किया जा रहा है। इस स्थिति ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। सबक लेने की बजाय फिर जोखिम
पुराने मामले और लिखित चेतावनी के बावजूद जर्जर गोदामों में दोबारा चावल भरना यह दर्शाता है कि अधिकारियों ने न तो पिछली कार्रवाई से सबक लिया और न ही सार्वजनिक धान की परवाह की। अब बड़ा सवाल यह है कि अगर चावल खराब हुआ तो 14.72 करोड़ की जवाबदेही किस पर तय होगी। उधर, यही हाल चालू सीजन की धान खरीदी के दौरान भी है। भंडारण के मुकाबले आधी है गोदामों की संख्या
इस मामले में वेयर हाउस प्रबंधक दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि भंडारण के लिए गोदामों की कमी है इसी कारण ओपन कैप की तुलना में इन गोदामों में भंडारण अपेक्षाकृत सही है। डीएम नॉन पंकज बोरसे ने बताया कि सतना जिले में खरीदी के लक्ष्य के मुकाबले में भंडारण के लिए आधे ही गोदामों की व्यवस्था है। गोदामों की कमी के चलते ही धान भी जर्जर गोदाम में भंडारित कराया जा रहा है। पंकज बोरसे ने बताया कि बारिश के पहले धान उठा लिया जाएगा।


